प्रकृति में मौजूद जैव विविधता से छेड़छाड़ करने के कई गंभीर परिणाम असाध्य बीमारियों के रूप में देखने को मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में ऐसी चुनौतियां मानव के सामने और भी गंभीर रूप ले लेंगी। इनसे बचने के लिए हमें जैव विविधता के संरक्षण की मुहिम चलाकर इसे जन आन्दोलन बनाना होगा। यह कहना था प्रधान मुख्य वन संरक्षक (होफ) ए. के. गोयल का।
गोयल सोमवार को वानिकी प्रशिक्षण संस्थान में अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के मौके पर आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने धरती पर प्रत्येक जीव-जन्तु व प्राणी के लिए एक खाद्य शृंखला बनाई है। हमने बिना सोचे समझे भौतिक विकास की दौड़ में पड़ कर इस शृंखला को कहीं न कहीं तोड़ डाला है व इसके क्या दुष्प्रभाव हमारी आने वाली पीढ़ियों के सामने आएगा।
उन्होंने कहा कि समुद्र में प्रतिवर्ष 8 मिलियन टन के आस-पास प्लास्टिक डाला जा रहा है जिससे पारिस्थितकीय सन्तुलन गड़बड़ा गया है। आने वाले समय में ये समुद्र में पहाड़ का रूप ले लेंगे जिसके कई गंभीर परिणाम सामने आएंगे। भारत की जैव विविधता के संरक्षण की सदियों पुरानी परम्परा का जिक्र करते हुए उन्होंने नदियों को जीवनदायिनी बताया ।
गोयल ने राजस्थान की जैव विविधता को दर्शाते हुए कार्यशाला के केन्द्र बिन्दु जैव विविधता एवं संवहनीय पर्यटन पर एक पोस्टर का भी विमोचन किया। इस मौके पर अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक(कैम्पा) ए.एस. बराड़, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कार्य आयोजना एवं वन बन्दोबस्त) सी. एस. रत्नासामी, राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष राजीव कुमार त्यागी समेत कई लोग मौजूद थे।