कर्ज में डूबे प्रदेश के किसानों को सरकार की ओर से बड़ी राहत मिलने जा रही है। सरकार ने राजस्थान के लघु व सीमांत किसानों तक कृषि मशीनरी का लाभ पहुंचाने के लिए ‘कस्टम हायरिंग सेंटर्स‘ की स्थापना की शुरूआत की है जिससे अब किसान कृषि कार्यों में उपयोग आने वाली महंगी मशीनों को किराए पर लेकर खेती कर सकेंगे।
इस पहल के माध्यम से राज्य सरकार कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देना चाह रही है जिसके लिए ‘सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन‘ के अंतर्गत यह अनूठी योजना शुरू की गई है। इस योजना के बारे में विस्तृत विवरण कोटा में 24 से 26 मई तक आयोजित होने वाले ‘ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट‘ (ग्राम) में किसानों को प्रदान किया जाएगा। ‘कस्टम हायरिंग सेंटर्स‘ के माध्यम से किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार कृषि यंत्र व उपकरण किराए पर प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उन्हें इस तरह के महंगे उपकरण खरीदने के लिए भारी कर्ज नहीं लेना पड़ेगा।
इन केन्द्रों में खेत की जुताई, बिजाई, पौध संरक्षण एवं फसल की कटाई से संबंधित कृषि यंत्र स्थानीय मांग के आधार पर रखे जा सकते हैं, जिससे आसपास के गांवों के किसानों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।
ये मशीनें होंगी उपलब्ध
एक कस्टम हायरिंग सेंटर द्वारा आदर्श स्थिति में 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उन्नत कृषि यंत्रों की उपलब्धता हो सकेगी। इनसे राज्य के छोटे व दूरदराज के किसानों को विशेष रूप से लाभ प्राप्त होगा। इन केंद्रो के जरिए किसानों को रोटोवेटर, रिवर्सिवल फ्लो, डिस्क हैरो, जीरो टिल सीड ड्रिल, रिज-फरो सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, रीपर कम बाइंडर, रेज्ड बेड प्लांटर एवं लेजर लैंड लेवलर जैसी आधुनिक कृषि मशीनें किराए पर उपलब्ध हो सकेगी।