गहलोत समर्थकों का मानना है कि अध्यक्ष के पद से गहलोत को दूर करने में कांग्रेस के ही किसी का काम है, जो भाजपा से मिला हुआ है। यह कोई बड़ी साजिश है। जिसका खुलासा समय पर होगा।
राजस्थान में सियासी भूचाल एक सप्ताह बाद भी थमता नजर नहीं आ रहा है। मुख्यमंत्री गहलोत ने सारी जिम्मेदार खुद पर ले ली है पर फिर भी राजस्थान में सियासी संकट टला नहीं है।
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अशोक गहलोत के राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ से बाहर होते ही राजस्थान मॉडल भी चकनाचूर हो गया है। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में इसका भारी रोष है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मानना है कि कोई भाजपा का एजेंट है, जो कांग्रेस में रहकर भाजपा को मजबूती दे रहा है। जिस राजस्थान मॉडल की चर्चा पूरे देश में हो रही थी, वो एक ही झटके में खत्म हो गया है।
राजस्थान के कांग्रेस के समर्थकों का मानना है कि अशोक गहलोत को पीछे धकेलने में कोई बड़ी साजिश है। जिसका खुलासा समय पर होगा। अगर गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो कांग्रेस को हिंदी भाषी प्रदेशों में खासी बढ़त मिलती और मोदी और शाह को टक्कर भी मिलती। अशोक गहलोत के राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के विचार को भी योजनाबद्ध तरीके से खत्म किया गया है।
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सूत्रों के अनुसार अजय माकन को अब राजस्थान में कबूल नहीं किया जाएगा। जानकार कहते हैं कि अजय माकन ने पहले दिल्ली, फिर पंजाब और अब राजस्थान का बेड़ा गर्क किया है। जिससे कांग्रेस को उभरने में खासी मेहनत और समय दोनों लगाना पड़ेगा। कहा जा रहा है कि अगर राजस्थान में मुख्यमंत्री का चेहरा बदला जाता है तो विधायक अपना मन बना चुके हैं कि सरकार और मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत नहीं मिल पाएगा। राजस्थान में गहलोत समर्थक विधायक अब गहलोत की भी सुनने को तैयार नहीं है। अब सीएम के लिए समर्थक सिर्फ गहलोत के नाम पर ही सहमत है। उन्हें कोई और नाम नहीं कबूल होगा।
राजस्थान में आज या कल फिर पर्यवेक्षक आएंगे और विधायक दल की बैठक होगी। जिसमें विधायक अपने राय आलाकमान तक पहुंचाना चाहते हैं। उसके बाद ही प्रदेश में चल रहे अनिश्चिता का दौर खत्म होगा।