सीएम अशोक गहलोत ने बजट पर हुई बहस का जवाब देते हुए राजस्थान विधानसभा सदन में जमकर केंद्र की बीजेपी सरकार और राजस्थान बीजेपी विधायक दल को आड़े हाथों लिया। गहलोत ने कहा, सबको मालूम है कि बजट पेश करते वक्त हमारी थीम क्या थी। भारत सरकार की मंशा भी सबके सामने है। पीएम ने राजसमंद में भी और दौसा में भी जिस तरह के भाव प्रकट किए, वो दुर्भाग्यपूर्ण है। क्योंकि आप राज्य सरकारों के बारे में जो कमेंट कर रहे हो, ये फेडरल डेमोक्रेसी में उचित नहीं है।
गहलोत ने कहा, केंद्र सरकार को आगे आकर हमेशा राज्यों की मदद करनी चाहिए, यहां उलटी गंगा बह रही है। राज्यपाल मनोनीत होने के बाद नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया जी तो बोल नहीं रहे, वरना ये तो बीजेपी की पैरवी करते कि केंद्र सरकार आपको इमदाद देती है फिर भी आप हमको दोष देते हो, लेकिन मैं दोष नहीं दे रहा हूं ये तो आंकड़े बोलते हैं।
भारत सरकार ने खर्चे में कटौती की...
गहलोत बोले, आंकड़े देखें तो हर क्षेत्र में भारत सरकार ने खर्चे में कटौती की है। बहुत लम्बी लिस्ट है। उनमें से पांच मैं आपको बताना चाहूंगा। पर्यावरण वानिकी में 40 फीसदी, सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम में 71.73 फीसदी की कटौती की गई है। जबकि दौसा रैली में पीएम ने कहा, राज्य में बॉर्डर पर इसलिए 50 साल में सड़कें नहीं बनीं कि कहीं दुश्मन देश के लोग इधर सड़कों पर नहीं आ जाएं, ऐसा कांग्रेस सरकारें सोचती थीं, बताइए ये कोई कमेंट था। आज सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम की उनको चिन्ता होनी चाहिए थी, लेकिन 71.73 प्रतिशत की कटौती उसमें भी कर दी। राष्ट्रीय शिक्षा मिशन में 17.54 फीसदी की कटौती, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण 30.47 फीसदी, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 32.90 फीसदी, पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम में 30 फीसदी कटौती और पीएम आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना में 71.19 फीसदी कटौती की।
नरेगा में की गई कटौती सबको मालूम है...
सीएम गहलोत बोले, नरेगा में की गई कटौती सबको मालूम है। जिस तरह केंद्र सरकार अपना रवैया अपना रही है, कमियां कर रही है, ये क्या दर्शाता है। मैंने पिछली बार सदन को बताया था और खर्च नहीं करना एक ही बात है। वो दोष देते हैं कि हम आपको पैसा भेजते हैं, आप खर्च नहीं करते। लेकिन मैंने लिस्ट बताई है, कहां-कहां उनका इतना पैसा खर्च नहीं हो पाया है। मनरेगा में 32.88 फीसदी कटौती, मिड डे मील में 10 फीसदी लगभग, यूरिया सब्सिडी में 14 फीसदी, अनुसंधान में 13 फीसदी, आईसीडीएस में 38 फीसदी, एनएफएसए में 17 फीसदी, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी हार्डवेयर में 41 फीसदी, अटल पेंशन योजना में 28 फीसदी कटौती, पवन ऊर्जा में 14 फीसदी और आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना में सात फीसदी की कटौती की गई। इस तरह कटौती तो की ही है, नए इनकम टैक्स स्लैब में सबको भ्रमित कर दिया। जो लोग अपेक्षा करते थे उसके आधार पर तो नहीं मिला, बल्कि एलआईसी, पीपीएफ, पीएफ, एनपीएस जहां लोग पैसा जमा कराते हैं, 80 सी की छूट होती है, उन सबमें कटौती कर दी गई। इसे उचित नहीं कहा जा सकता है।
केंद्र सरकार राज्यों के साथ कर रही भेदभाव...
सीएम गहलोत ने कहा, जिस तरह केंद्र सरकार राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है। मुझे याद है पहले भी मैंने सदन के सदस्य के सामने रखा था कि एक तरफ भारत सरकार टीम इंडिया की बात करती है। टीम इंडिया के मायने क्या हैं, सभी राज्य सरकारें और केंद्र सरकार मिलकर टीम बनाएं। यहां कौन सी टीम इंडिया में मजबूत हो रही है समझ से परे है। राज्यों के साथ किस तरह भेदभाव सरकार कर रही है, उसका मैं उदाहरण देना चाहता हूं।
15वें वित्त आयोग ने 32 फीसदी से 42 फीसदी राज्यों का हिस्सा बढ़ाया, लेकिन उलटा रास्ता निकालकर तमाम बढ़ाया हुआ बराबर कर दिया। पहले राज्यों के साथ शेयरिंग पैटर्न राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन में 100 फीसदी केंद्र का 0 फीसदी राज्यों का था, अब 40-60 कर दिया। राज्य कृषि विकास योजना में 100 फीसदी केंद्र और 0 फीसदी राज्य का यूपीए सरकार के वक्त था, उसे भी 40-60 कर दिया। समेकित बाल विकास सेवाओं में 90-10 था, अब 40-60 फीसदी अनुपात कर दिया। इसी तरह से कई योजनाओं में पैटर्न 40-60 कर दिया गया।
राजस्थान में प्रति व्यक्ति आय 1.56 लाख हुई...
गहलोत ने कहा, साल 2022-23 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय एक लाख 56 हजार 149 रुपये हुई, जो पिछले साल से 14.85 फीसदी ज्यादा है। पिछले 11 साल में प्रति व्यक्ति में सर्वाधिक बढ़ोतरी पिछले साल 18.10 फीसदी रही है। प्रति व्यक्ति आय में पिछले चार साल में 10.01 फीसदी की औसत बढ़ोतरी देखी गई है। जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह वृद्धि 7.89 फीसदी ही रही है। पिछले तीन साल में राजस्थान अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक प्रति व्यक्ति आय वाले राज्यों पिछड़े राज्यों से निकलकर अग्रणी राज्यों में खड़ा हो गया है। सांख्यिकी कार्यक्रम इम्प्लीमेंटेशन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा अगस्त 2022 में जारी विभिन्न राज्यों की जीएडीपी के अनुसार पिछले 10 साल में प्रति व्यक्ति आय में रही वृद्धि दर के एनालिसिस से पता चलता है कि सर्वाधिक प्रतिव्यक्ति वाले राज्यों में राजस्थान का स्थान पिछली सरकार के वक्त 2016-17 में 21वें पर, 2017-18 में 30वें पर, 2018-19 में 19वें पर रहा था। जबकि मौजूदा राज्य सरकार की कुशल नीतियों के कारण राजस्थान का स्थान 2019-20 में 12वें पर, 2020-21 में 10वें पर और 2021-22 में 9वें पर रहा है।