राजस्थान के अलवर जिले में एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका दिव्यांग लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे रही हैं। शिक्षिका आशा सुमन का कहना है कि दिव्यांग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न होने का अधिक खतरा होता है। इसलिए महत्वपूर्ण है कि उन्हें सेल्फ डिफेंस सिखाया जाए। जिससे वे अपनी रक्षा कर सकें।
डेली एक्टिविटी से सिखाते हैं डिफेंस के गुर
उन्होंने बताया कि सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग के तहत पंच, किक, फॉरवर्ड और बैकवर्ड हैंड मूवमेंट आदि सिखाया जाता है, जो न केवल लड़कियों को परिस्थितियों का सामना करने के लिए सशक्त बनाता है बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। दैनिक गतिविधियों जैसे कि वे कैसे एक दरवाजा खोलते हैं, अपने दांत ब्रश करते हैं, सीढ़ियां चढ़ते हैं आदि से डिफेंस गुर सिखाए जाते हैं। इस पद्धति के माध्यम से, वे बहुत जल्दी सीखती हैं और 10-12 दिनों की अवधि में ही पूरी तरह से प्रशिक्षित हो जाती है। हालांकि, विभिन्न अक्षमताओं के ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तकनीक सिखाई जाती हैं।
दिव्यांग की मां ने कहा- अब मेरी बेटी अपनी रक्षा कर सकती है
प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने जोधपुर से आई पूजा गोस्वामी ने बताया कि सेल्फ डिफेंस सीखना बहुत आसान था और अब वह आत्मविश्वास से लबरेज हैं। पूजा की मां ने कहा कि जब वह अकेली बाहर जाती थी तो पूजा की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंतित रहती थी लेकिन अब मुझे लगता है कि वह अपनी रक्षा कर सकती है।
अलवर जिले की 12वीं कक्षा की छात्रा मोनिका ने कहा कि मैं देख नहीं सकती लेकिन फिर भी मैं अपनी रक्षा कर सकती हूं। अगर हमलावर मुझे पीछे से मारता है, तो मैं अपनी कोहनी से उस पर हमला कर सकती हूं। अगर हमलावर सामने से हमला करता है, तो मैं हथेली से मारकर अपनी रक्षा कर सकता हूं। उन्होंने कहा कि मैंने खुद को बचाने के गुर सीखे हैं।