बुलंद दरवाजे पर झंडे की रस्म अदा करते हुए
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विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 805वें उर्स की अनौपचारिक शुरूआत हो गई है। भीलवाड़ा के गौरी परिवार ने बुलंद दरवाजे पर झंडे की रस्म अदा कर इसकी घोषणा की। ख्वाजा साहब के उर्स में झण्डे की रस्म अदा करने के लिए अजमेर पहुंचे गौरी परिवार ने गरीब नवाज गेस्ट हाउस से झण्डे का जुलूस शुरू करवाया।
जुलूस कव्वालियों और बैंड—बाजों के साथ लंगरखाना गली होते हुए निजाम गेट पहुंचा। यहां से दरगाह में प्रवेश कर बुलंद दरवाजे पर सम्पन्न हुआ। इसके बाद फखरूद्दीन गौरी ने बुलंद दरवाजे पर झण्डा फहराकर उर्स की अनौचारिक घोषणा की। जुलूस के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। वहीं, हजारों की संख्या में जायरीन ने भी झण्डे की रस्म में शिरकत की।
दरगाह के वरिष्ठ खादिम सैयद फखर काजमी चिश्ती ने बताया कि सदियों पहले संदेश देने के कोई साधन नहीं हुआ करते थे, उस समय झण्डे चढ़ाकर संदेश दिया जाता था। उर्स में झण्डा चढ़ाने की परम्परा अफगानिस्तान के बादशाह ने शुरू की थी। इसके बाद गौरी परिवार नियमित रूप से अपने जायरीन के साथ आकर झण्डा चढ़ाता है।