भरतपुर के सेवर कस्बे में पिछले दिनों एक अवैध मैरिज होम में 24 लोगों की मौत जैसा बड़ा हादसा होने के बाद भी राजस्थान में अब तक मात्र 100 मैरिज होम्स पर ही कार्यवाही हो पाई है। जबिक इस घटना के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मैरेज गार्डनों की जांच के आदेश देकर सख्त कार्यवाही करने को कहा था।
गौरतलब है कि गत 10 मई की रात को भरतपुर में सेवर कस्बे में स्थित अन्नपूर्णा मैरिज होम 24 मौतों का कारण बना। घटना के बाद मैरिज होम संचालक लक्ष्मण प्रसाद शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। गम्भीर बात ये थी कि मैरेज होम बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा था, निकाय या निगमों की ओर से जो मानक तय किए जाते है, उसका पालन तो दूर की बात थी। हालांकि अन्य जगह के मुकाबले भरतपुर में जरूर कार्यवाही का आंकड़ा कुछ अधिक है, लेकिन इसे भी संतोषजनक नहीं कहा जा सकता।
प्रदेश में अब तक केवल 100 मेरिज गार्डनों के खिलाफ कार्यवाही की गई है। अकेले भरतपुर में अवैध रूप से चल रहे 54 मैरेज होम्स के खिलाफ कार्यवाही हो चुकी है। जयपुर में भी एक दर्जन से अधिक, धौलपुर में आध दर्जन से अधिक मैरेज होम्स सील किए गए हैं, वहीं कोटा में करीब तीन मेरिज गार्डन सील किए गए हैं। कई मैरिज होम्स को केवल नोटिस जारी कर खाना पूर्ति कर दी है।
खास बात यह है कि प्रशासन ने उन मैरिज गार्डनों को छुआ तक नहीं है, जो रसूखदारों के हैं। कई मैरेज गार्डन नेताओं आदि के हैं, जिन्हें जांच से दूर रखा गया है। कई मैरेज गार्डनों को तो नोटिस तक जारी नहीं किया गया है।
हकीकत यह है कि प्रदेश की राजधानी में ही सभी विवाह स्थल पंजीकृत नहीं है। इनमें से करीब साठ फीसदी ही हैं, जिन्होंने नगर निगम की ओर से लाइसेंस रिन्यू करवाए हुए हैं। जब राजधानी में ही यह हालत है तो प्रदेश के दूसरे जिलों व कस्बों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जानकार बताते हैं कि विवाह स्थलों के लिए स्थानीय निकायों की ओर से नियम बनाए गए हैं, उन्ही नियमों के तहत लाइसेंस जारी किया जाता है। विवाह स्थल पर अग्निशमन यंत्र के इंतजाम, विवाह स्थल का करीब पच्चीस फीसदी हिस्सा पार्किंग के लिए रिजर्व जैसे नियम बने हुए हैं। लेकिन 80 फीसदी मैरेज हॉल इन्हें नजर अंदाज कर देते हैं।