फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

युवक ने कोर्ट में लगाई गुहार, मैं विमंदित नहीं हूं, बिल्कुल सही हूं

Sat, 10 Feb 2018 05:09 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
विज्ञापन
कोर्ट - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
एक व्यक्ति ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि उसे विमंदित घोषित करने वाले आदेश को रद्द किया जाए, जबकि वह पूरी तरह ठीक है।
विज्ञापन


जयपुर के अतिरिक्त जिला न्यायालय क्रम-15 ने तीस नवंबर 2006 को इंजीनियरिंग छात्र को विमंदित घोषित करने के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर छात्र के पिता सूरजभान व अन्य को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न पूर्व के आदेश को रद्द कर दिया जाए। अदालत ने जवाब पेश करने के लिए बीस मार्च का समय दिया है। अदालत ने यह आदेश विजयपाल की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिए।

विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर महानगर की ओर से विजयपाल को मुहैया कराई गई अधिवक्ता शालिनी श्योराण ने बताया कि अपीलार्थी के पिता ने मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1947 के तहत सीजेएम अदालत में प्रार्थना पत्र पेश किया था।
विज्ञापन


 
विज्ञापन

सवालों का दिया था सही-सही जवाब

Court
प्रार्थना पत्र में कहा गया कि उसके बेटे विजयपाल को मनोचिकित्सा केन्द्र में भेजने के लिए रिसेप्शन ऑर्डर जारी किया जाए। जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने 30 नवंबर 2006 को अपीलार्थी को मनोचिकित्सा केन्द्र भेज दिया गया। वहां कुछ दिनों तक अपीलार्थी को भर्ती रखकर छोड़ दिया गया। इसके बाद वह मुम्बई चला गया।

गत दिनों उसने विधिक सेवा प्राधिकरण में संपर्क कर निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया। इस पर प्राधिकरण ने शालिनी श्योराण को प्रकरण में निशुल्क अधिवक्ता नियुक्त किया। श्योराण ने बताया कि सुनवाई के दौरान अदालत ने विजयपाल से कुछ सवाल भी किए, जिसका उसने सही-सही जवाब दिया।


 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें