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बेटी की चाह ने गोद में डाले सात बेटे, अब नदी किनारे यूं पूरी हुई मुराद

Tue, 26 Sep 2017 11:23 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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नवजात बच्ची व बच्चे के साथ सुखीदेवी - फोटो : अमर उजाला
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एक दंपती को बेटी की चाहत थी। इसी चाहत में एक के बाद एक सात बेटे हो गए। आखिरकार नदी के किनारे दंपती की ये आस पूरी हो गई। एकाएक उन्हें यहां दो दिन की बच्ची लावारिस हालत में मिली। अब इस परिवार को बिटिया मिल गई और उस अनाथ को अपनों का साथ नसीब हो गया।
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फिल्मी लगने वाली यह कहानी है धौलपुर के मानियां के सैमर का पुरा में रहने वाले दंपती की है। सुखी देवी ने 14 सितंबर को एक बेटे को जन्म दिया। यह इस दंपती का सातवां बेटा है, लेकिन उन्हें बेटी की चाहत थी। बेटे के जन्म के बाद परिवार में वैसी खुशी नजर नहीं आई।

इसके अगले दिन सुखी देवी के पति लीलाधर पार्वती नदी के किनारे बैठे थे। वहां उन्हें एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने जब आसपास देखा तो लावारिस हालत में एक दो-तीन दिन की बच्ची पड़ी थी, जिसके शरीर पर चीटियां चिपकी हुई थीं। उन्होंने आसपास बच्ची के परिजनों को तलाशा, काफी देर तक जब कोई नहीं मिला तो वे उसे अपने घर ले आए।
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विभाग ने लगाया ये अड़ंगा

घर लाकर उन्होंने बच्ची को अपनी पत्नी को सौंप दिया। सुखी देवी ने बच्ची को नहलाकर अपना दूध पिलाया। उसके बाद से बच्ची उन्हीं को अपनी मां समझ रही है। परिवार ने बच्ची का नाम भारती रखा है। उनका कहना है कि भारत मां ने उन्हें यह बेटी दी है, इसलिए यह नाम रखा गया है।

यह दंपती अब कानूनी रूप से भी बच्ची को अपनाना चाहता है। उनके वकील का कहना है कि दंपती बेटी चाहता था, लेकिन बेटे होते गए। परिवार सक्षम है, बेटी को चाहता है, ऐसे में वे कोर्ट से इस बेटी को अपनाने का अधिकार मांगेंगे।

उधर, समाज कल्याण विभाग को इसकी जानकारी मिली तो विभाग दंपती से बच्ची को दोबारा सौंपने को कह रहा है। जानकारी के मुताबिक परिवार ने ही विभाग को पत्र लिखकर बेटी के बारे में हुआ पूरा प्रकरण बताया। इसके बाद विभाग ने उनसे बच्ची को सौंपने की बात कह दी। अभी तक बच्ची दंपती के पास ही है।
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