नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी आसाराम को अपना 77वां जन्मदिन भी जोधपुर की सेंट्रल जेल में ही मनाना पड़ेगा। नवाबशाह जिले के बेराणी गांव में जो अब पाकिस्तान में है, में 17 अप्रेल 1941 को जन्मे आसाराम की सोमवार को भी अदालत में पेशी हुई।
गौरतलब है कि आसाराम को जेल में बंद हुए पौने चार वर्ष हो चुके हैं। आसाराम जेल से बाहर आने के लिए छटपटा रहे हैं, लेकिन आसाराम की ओर से आधा दर्जन से अधिक जमानत याचिकाओं व अर्जियों को अदालत खारिज कर चुकी है। वे अपनी जमानत के लिए निचली अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक सभी के दरवाजों पर दस्तक दे चुके हैं। उनके जन्मदिन और पेशी के चलते बड़ी संंख्या में आसाराम समर्थक जोधपुर में जेल के बाहर जमा थे।
कौन है आसाराम
— आसूमल थाउमल हरपलानी उर्फ आसाराम का परिवार वर्ष 1947 के बाद गुजरात के अहमदाबाद में आकर बस गया था। यहां आने के बाद उन्होंने अपना घर छोड़ दिया था।
— आसाराम की शादी लक्ष्मी देवी से हुई। आसाराम के एक पुत्र नारायण सांई और पुत्री भारती देवी है।
— शादी के बाद आसाराम वृंदावन चले गए और वहां एक गुरू से दीक्षा लेने के बाद उन्होंने अपना नाम बदल लिया। फिर वे आध्यात्मिक प्रवचन देने लगे, जिसके बाद उनके अनुयायियों की संख्या में ईजाफा होने लगा।
— वर्ष 2013 अगस्त में एक नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया कि जोधपुर के आश्रम में आसाराम ने उसके साथ दुष्कर्म किया है।
— दो दिन बाद आसाराम के खिलाफ लड़की के पिता ने दिल्ली में रिपोर्ट दर्ज करवा दी। इसके बाद पुलिस ने पीड़िता मेडिकल टेस्ट कराया व आसाराम को पूछताछ के लिए समन भेजा।
— लेकिन जब आसाराम हाजिर नहीं हुए तो दिल्ली पुलिस ने आसाराम के खिलाफ धारा 342, 376 और 506 के अंतर्गत केस दर्ज कर लिया।
— वहीं इंदौर में उनके प्रवचन कार्यक्रम के दौरान जब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची, तो हंगामा हो गया। इसी दौरान एक सितंबर 2013 को पुलिस ने आसाराम गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें जोधपुर जेल शिफ्ट कर दिया गया।
— बीते करीब चार वर्षों इस केस में कई बदलाव आए। आसाराम पर गवाहों पर हमले व हत्या के आरोप भी लगे। वहीं, वे जमानत को लेकर देश के सर्वोच्च न्यायालय तक गुहार लगा चुके है, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली है।