जायकॉव-डी को 20 अगस्त को दवा नियामक (DCGI) से आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली थी। इसकी तीन खुराकों को 28 दिनों के अंतराल पर दिया जाना है। देश में विकसित यह दुनिया का पहला ऐसा टीका है, जो डीएनए आधारित और सुई रहित है।
जायडस कैडिला के कोरोना वायरस के खिलाफ टीके जायकोव-डी को भारत के औषधि नियामक की ओर से 12 वर्ष और इससे अधिक आयु के लोगों के लिए अनुमति दी गई है। लेकिन सूत्रों ने रविवार को बताया कि फिलहाल यह टीका केंद्र सरकार के राष्ट्रीय कोरोना वायरस रोधी टीकाककरण अभियान के तहत केवल वयस्कों को ही लगाया जाएगा।
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समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, 'जायकोव-डी टीका, जिसे भारत के औषधि नियामक की ओर से 12 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए अनुमोदित किया गया है, अभी देश में चल रहे राष्ट्रीय कोविड-19 महामारी के खिलाफ टीकाकरण अभियान के तहत केवल वयस्कों को ही लगाया जाएगा।'
केंद्र ने दिया है एक करोड़ खुराकों का ऑर्डर
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भी इस स्वदेशी सुई रहित टीके को टीकाकरण अभियान में शामिल करने के लिए प्रारंभिक कदम उठाने की अनुमति मिल चुकी है। जल्द ही यह टीका भी टीकाकरण अभियान में शामिल हो जाएगा। अहमदाबाद की कंपनी जायडस कैडिला को स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक करोड़ खुराकों की खरीद का ऑर्डर भी दे दिया है।
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बच्चों के टीकाकरण में जल्दबाजी नहीं करेंगे
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बीते गुरुवार को कहा था कि सरकार बच्चों का टीकाकरण करने में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती है और इस संबंध में कोई भी फैसला विशेषज्ञों की राय के आधार पर लिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि बच्चों का टीकाकरण दुनिया में कहीं भी बड़े स्तर पर नहीं हो रहा है, कुछ देशों में यह सीमित स्तर पर हो रहा है।