मुनाफे का निजीकरण, घाटे का राष्ट्रीयकरण
बतौर अनुपम, सरकार ने मुनाफे का निजीकरण कर दिया है और घाटे का राष्ट्रीयकरण। यस बैंक का उदाहरण सबके सामने है। उसे बचाने एसबीआई को सामने आना पड़ा है। घाटे वाले उपक्रमों को पब्लिक सेक्टर खरीदेंगे और लाभ वाली इकाइयों को देश के दो उद्योगपति खरीदेंगे। ये क्या बात हुई। आज बेरोजगारी की गंभीर स्थिति है। 90 फीसदी असंगठित क्षेत्र है। यहां पर रोजगार तभी मिलेगा, जब भारी निवेश होगा। ये सब नहीं हो रहा है। नतीजा, सरकारी विभागों पर नौकरी का दबाव बढ़ रहा है। इस बीच सरकार इतना तो कर सकती है कि सरकारी नौकरी समय पर दे दे। परीक्षाओं के नतीजे कई सालों में आ रहे हैं। सरकारी लापरवाही के चलते नौकरी के लिए युवाओं की आयु निकल रही है। देश में आज भी कम से कम 40 लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं। अकेले केंद्र की बात करें तो वह संख्या लगभग आठ लाख है। युवाओं में आक्रोश है कि उन्हें पढ़-लिखकर भी नौकरी नहीं मिल पा रही है। 'युवा हल्ला बोल' के कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद मिश्रा ने कहा, 17 सितंबर को कहीं थाली बजाकर, कहीं बेरोज़गारी मार्च निकालकर तो कहीं 'जुमले का केक' काटकर मोदी जी का जन्मदिन मनाया जाएगा।