यह मिश्रण 2024 के लोकसभा के चुनावों की मजबूत आधारशिला...
भारतीय जनता पार्टी ने योगी सरकार की कैबिनेट के माध्यम से अगले चुनावों की पूरी पिच तैयार कर ली है। राजनैतिक विश्लेषक मानते हैं कि जिस तरीके से जातिगत समीकरणों को साधते हुए योगी कैबिनेट बनाई गई है, वह लोकसभा चुनावों की सबसे मजबूत बिसात है। योगी सरकार की इस कैबिनेट में दलितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों समेत सवर्णों का जो मिश्रण तैयार किया है, वही 2024 के लोकसभा के चुनावों की मजबूत आधारशिला मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषक और उत्तर प्रदेश की राजनीति को बखूबी समझने वाले जीडी शुक्ला कहते हैं कि जिस तरीके से इस बार योगी कैबिनेट में कुछ बड़े नामों को बड़ी जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ाया गया है, वह निश्चित तौर पर न सिर्फ योगी सरकार को मजबूती के साथ आगे बढ़ाएंगे, बल्कि 2024 से लेकर 2027 के चुनावों में बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं। शुक्ला के मुताबिक जिस तरीके से बृजेश पाठक का कद बढ़ाकर उपमुख्यमंत्री के स्तर तक पहुंचा दिया गया है, वह बताता है कि जातिगत समीकरणों को साधते हुए भाजपा ने कितना बड़ा दांव लगाया है। इसके अलावा दलितों में बड़े नाम के तौर पर बेबी रानी मौर्य और असीम अरुण जैसे और कई नामों को आगे रखा है।
पिछड़े नेताओं को कर रही है आगे
भारतीय जनता पार्टी ने इसके अलावा पिछड़ी जातियों में अपनी जबरदस्त पैठ बनाने के लिए नई कैबिनेट में बड़ी फिल्डिंग सजाई है। इस कड़ी में पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष और पिछड़ी जाति के बड़े नेता स्वतंत्र देव सिंह को भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर न सिर्फ बड़ा दांव चला है, बल्कि अगले चुनावों पर सटीक निशाना भी साधा है। स्वतंत्र देव सिंह के अलावा पिछड़ों के चेहरे केशव प्रसाद मौर्या को चुनाव हारने के बाद उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी पिछड़ों की नुमाइंदगी में बिल्कुल पीछे नहीं रहना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर कहते हैं कि वैसे तो भारतीय जनता पार्टी के पास पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों के कई बड़े चेहरे हैं। साथ ही भाजपा के सहयोगी दलों, जिसमें अपना दल प्रमुख रूप से पिछड़ों का बड़ा दल माना जाता है, उसका भी परस्पर सहयोग बना हुआ है। वह कहते हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी किसी दूसरे दल के सहारे ही सिर्फ पिछड़ों की राजनीति नहीं करना चाह रही है। और यही वजह है कि पार्टी समानांतर रूप से अपने पार्टी के पिछड़े नेताओं को आगे कर रही है।
नए मुस्लिम चेहरे आगे
इन सबके अलावा जिस तरीके से योगी की नई कैबिनेट में एक नए मुस्लिम चेहरे को सामने रखा गया है, उससे एक उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में और भी कई मुस्लिम चेहरे पार्टी के नाम पर आगे बढ़ाए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि योगी की पहली कैबिनेट में शिया समुदाय से मुस्लिम चेहरे को मंत्री बनाया गया था। लेकिन इस कैबिनेट में जिस मुस्लिम चेहरे को मंत्री बनाया गया है, वह सुन्नी समुदाय से आते हैं।
शुक्ला का कहना है कि इस समुदाय के लोगों के परंपरागत वोट बैंक पर भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर सभी राजनीतिक दल अपनी दावेदारी करते आए हैं। वे कहते हैं कि ट्रिपल तलाक के अलावा कई अन्य केंद्र और राज्य की लोक कल्याण योजनाओं में जिस तरीके से मुस्लिम समुदाय को भी फायदा पहुंचा है और मुस्लिम समुदाय की महिलाओं समेत उनके समाज ने भाजपा को वोट देकर परस्पर विश्वास पैदा करने की अपील की है। पार्टी अब इस दिशा में कैबिनेट में नए चेहरे को देकर संदेश दे चुकी है।