अध्ययन के नतीजों के मुताबिक, योग करने से मरीजों में गठिया की समस्या कम हुई। योग करने से सूजन पैदा करने वाले साइटोकिन्स जैसे आईएल 6, आईएल 17ए, टीएनएफए में बड़े पैमाने पर कमी आई। साथ ही दिमाग और शरीर के बीच संचार स्थापित करने वाले मार्कर्स जैसे बीडीएनएफ, डीएचईएएस, इंड्रोफिन्स और सिर्टुइन्स में बढ़ोतरी हुई, जिससे जीवन स्तर में सुधार आया।
मांसपेशियों की बढ़ाता है ताकत
डिपार्टमेंट ऑफ एनाटॉमी में लैब फॉर मॉलिक्यूलर रिप्रोडक्शन एंड जेनेटिक्स की प्रोफेसर डॉ. रीमा दादा ने बताया कि योग से व्यापक पैमाने पर गठिया के मनोदैहिक लक्षण को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि योग गठिया में दर्द को कम करने में मदद करता है। साथ ही यह विकलांगता को कम करने के साथ जोड़ों के लचीलेपन को बढ़ाता है। मांसपेशियों की ताकत को बढ़ाता है और पूरे शरीर के साथ दिमाग का समन्वय ठीक करता है, जिससे रोग की गतिविधियां कम होती हैं और मरीजों को आराम मिलता है। बता दें कि इस अध्ययन पर डॉ. रीमा दादा ने रूमेटोलॉजी के प्रोफेसर और हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. उमा कुमरा के साथ मिलकर किया।