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International yoga day: शारीरिक और मानसिक बीमारियों से दूर रखेगा योग, एम्स ने किया दावा

Mon, 21 Jun 2021 06:21 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आप गठिया समेत कई शारीरिक और मनोवैज्ञानिक बीमारियों से दूर रहेंगे। ऐसा हम नहीं देश का सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने अपने एक अध्ययन में दावा किया है। 
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विस्तार
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दुनिया भर में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। इस बार भी सारी तैयारियां हो गईं। हालांकि, कोरोना संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के ज्यादातर कार्यक्रम डिजिटल, वर्चुअल और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ही आयोजित किए जाएंगे। योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आप गठिया समेत कई शारीरिक और मनोवैज्ञानिक बीमारियों से दूर रहेंगे। ऐसा हम नहीं देश का सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने अपने एक अध्ययन में दावा किया है।

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दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के एक अध्ययन में दावा किया गया है कि योग ऑटोइम्यून ऑर्थराइटिस यानी रूमेटाइड गठिया के इलाज में बेहद कारगर है। इस अध्ययन में कहा गया है कि योग किसी बीमारी के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों पहलुओं पर केंद्रित होता है।

एम्स में एनाटॉमी विभाग के मॉलिक्यूलर रिप्रोडक्शन एंड जेनेटिक्स की प्रोफेसर लैब डॉ. रीमा दादा ने अपने शोध पत्र में कहा है कि गंभीर गठिया के प्रबंधन में योग को एक सहायक चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। गठिया के इलाज के साथ मरीज अगर योग करते हैं, तो उनके लिए अच्छा रहता है। अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करके मरीज अपने ज्वाइंट यानी जोड़ों मे लचीलाचन ला सकते हैं और इससे दर्द कम कर सकते हैं। 
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इतने लोगों पर किया गया अध्ययन
एम्स का यह अध्ययन रूमेटाइड ऑर्थराइटिस से पीड़ित 66 लोगों पर किया गया, जो फ्रंटियर्स ऑफ साइकोलॉजी में प्रकाशित हुआ। अध्ययन में कहा गया है कि योग को इस ऑटोइम्यून बीमारी के इलाज के लिए सहायक चिकित्सा पद्धति के रूप में जोड़ा जाना चाहिए। इससे इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को फायदा होगा। 

गठिया मरीजों के लिए है बेहद लाभकारी:
एम्स के अध्ययन में दावा किया गया है कि योग से रूमेटाइड ऑर्थराइटिस के क्लीनिकल आउटकम में सुधार आया है यानी इस बीमारी के इलाज में फायदा हुआ। इसमें कहा गया है कि योग गठिया के सूजन को कम करता है। इसका लाभकारी प्रभाव साइको-न्यूरो-इम्यून एक्सिस यानी मनोवैज्ञानिक तंत्रिका प्रतिरक्षा प्रणाली पर पड़ता है और यह उनमें गठिया के कारण आई अनियमितताओं और विकृतियों को दूर करने में मदद करता है। साथ ही हड्डियों के जोड़ों में आई सूजन को कम करता है। 

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दिमाग को दुरुस्त करता है योग

अध्ययन के नतीजों के मुताबिक, योग करने से मरीजों में गठिया की समस्या कम हुई। योग करने से सूजन पैदा करने वाले साइटोकिन्स जैसे आईएल 6, आईएल 17ए, टीएनएफए में बड़े पैमाने पर कमी आई। साथ ही दिमाग और शरीर के बीच संचार स्थापित करने वाले मार्कर्स जैसे बीडीएनएफ, डीएचईएएस, इंड्रोफिन्स और सिर्टुइन्स में बढ़ोतरी हुई, जिससे जीवन स्तर में सुधार आया।

मांसपेशियों की बढ़ाता है ताकत 
डिपार्टमेंट ऑफ एनाटॉमी में लैब फॉर मॉलिक्यूलर रिप्रोडक्शन एंड जेनेटिक्स की प्रोफेसर डॉ. रीमा दादा ने बताया कि योग से व्यापक पैमाने पर गठिया के मनोदैहिक लक्षण को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि योग गठिया में दर्द को कम करने में मदद करता है। साथ ही यह विकलांगता को कम करने के साथ जोड़ों के लचीलेपन को बढ़ाता है। मांसपेशियों की ताकत को बढ़ाता है और पूरे शरीर के साथ दिमाग का समन्वय ठीक करता है, जिससे रोग की गतिविधियां कम होती हैं और मरीजों को आराम मिलता है। बता दें कि इस अध्ययन पर डॉ. रीमा दादा ने रूमेटोलॉजी के प्रोफेसर और हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. उमा कुमरा के साथ मिलकर किया।
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