6000 करोड़ के यस बैंक धोखाधड़ी मामले के आरोपी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के प्रमोटर धीरज वधावन ने मेडिकल आधार पर सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मांगी है। कोर्ट ने इस पर सीबीआई और ईडी से जवाब मांगा है।
चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस एएस बोपन्ना व जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने जांच एजेंसियों से पूछा कि जब आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है तो आरोपी को जेल में क्यों रखना चाहते हैं? हम जानना चाहते हैं कि अब उसे जेल में रखने का औचित्य क्या है? आप आगे जांच चाहते हैं और क्या जांच करना चाहते हैं?उसे जेल या अस्पताल में रहने दो, पर हमें बताओ कि अब उससे क्या उगलवाना है? इस बात से आप इनकार नहीं कर रहे हो कि वह 20 माह से जेल में है। पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के आग्रह पर जांच एजेंसियों की राय पता कर बताएं, इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 जनवरी को तय कर दी।
6000 करोड़ के घोटाला, 600 करोड़ दी गई रिश्वत : राजू
सुनवाई के दौरान अति. सॉलिसीटर जनरल एसवी राजू ने सीबीआई व ईडी की ओर से पेश होते हुए कहा कि आरोपी देश के श्रेष्ठ अस्पतालों में से एक में भर्ती है। वह कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल में श्रेष्ठ उपचार पा रहा है। राजू ने कहा कि यह देश के बड़े बैंक घोटालों में से एक है, जिसमें करीब 6000 करोड़ रुपये की राशि की हेराफेरी की गई है। 600 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई है और देश के मध्यम व गरीब वर्ग के लोगों का पैसा हड़पा गया है। इसके साथ ही उन्होंने जवाब दाखिल करने का समय मांगा।
स्वास्थ्य को लेकर अतिशयोक्तिपूर्ण दावे
इस पर पीठ ने सवाल किया कि क्या आप मेडिकल आधार पर मांगी गई जमानत के विरोध में ये दलीलें दे सकते हैं? इस पर राजू ने कहा कि वह इस सवाल का जवाब दे रहे हैं कि आरोपी को जेल में क्यों रखना चाहते हैं। जहां तक मेडिकल आधार का सवाल है तो स्वास्थ्य को लेकर अतिशयोक्तिपूर्ण दावे किए गए हैं और दूसरा यह कि आरोपी का देश के श्रेष्ठ अस्पतालों में से एक में श्रेष्ठ इलाज चल रहा है।