राष्ट्रपति कोविंद को लिखे पत्र में येचुरी ने दावा किया कि जम्मू को पांच दिसंबर को आरएसएस से संबंधित एक संगठन के कार्यक्रम में मित्तल ने भारतीय संविधान के खिलाफ बातें कहीं।
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मांग की कि वे जम्मू कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्तल को पद से हटा दें। उन पर कथित तौर पर भारतीय संविधान के खिलाफ बोलने का आरोप है।
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राष्ट्रपति कोविंद को लिखे पत्र में येचुरी ने दावा किया कि जम्मू में पांच दिसंबर को आरएसएस से संबंधित एक संगठन के कार्यक्रम में मित्तल ने भारतीय संविधान के खिलाफ बातें कहीं। येचुरी ने कहा कि मीडिया में जस्टिस मित्तल का अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के एक सेमिनार में दिया गया भाषण व्यापक रूप से प्रकाशित हुआ था। इसमें उन्होंने कहा था कि संविधान की प्रस्तावना में धमनिरपेक्षता और समाजवादी शब्द शामिल करने से भारत की आध्यात्मिक छवि संकीर्ण हुई।
येचुरी ने कहा कि जस्टिस मित्तल ने कथित तौर पर यह भी कहा कि कभी कभी हम हमारी जिद के कारण भी संशोधन लाते हैं। माकपा प्रमुख ने कहा कि एक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा देश के संविधान के खिलाफ बयान, वह भी एक मंच से जो खास विचारधारा का प्रचार करता है, एक अक्षम्य अपराध है। यह उनके द्वारा संवैधानिक कार्यों को करने के लिए ली गई शपथ का उल्लंघन है।
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माकपा महासचिव ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि संविधान के संरक्षक और देश के प्रमुख के रूप में संविधान की पवित्रता और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए जस्टिस मित्तल को पद से हटाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करें।