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अलविदा 2019: ऑपरेशन बालाकोट, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और नागरिकता कानून

Sat, 28 Dec 2019 02:08 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, वाराणसी

सार

  • नये राष्ट्रवाद ने राहुल गांधी को पछाड़ा, सोनिया आईं
  • लोकसभा चुनावों ने विपक्ष में भरी हताशा, तो राज्यों के चुनाव ने जगाई उम्मीद
  • चौकीदार चोर का नारा पड़ा उलटा, नागरिकता कानून से ठिठकी एनआरसी की राह
  • अर्थव्यवस्था मंद, शेयर बाजार मुस्कराया
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सेना के जवानों से मिलते पीएम मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : Social media
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विस्तार
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2019 तुम बहुत याद आओगे। इन्ही शब्दों के साथ 2020 के स्वागत का शोर सुनाई देना शुरू हो गया है। छोटे शहरों में भी अब नया वर्ष और हैप्पी क्रिसमस ने तेजी से अपनी जगह बना ली है। वैसे भी 2019 का साल अपने कई बेहतरीन बदलावों के लिए याद किया जाएगा। 2018 में राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में मिली सफलता से उत्साहित विपक्ष ने 2019 का शानदार स्वागत किया था, वहीं 2019 के मध्यकाल ने सत्तारूढ़ भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरोसा जताकर विपक्ष को तेजहीन कर दिया था।

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आपरेशन बालाकोट ने भारतीय सैन्यशक्ति दिखाई तो शेयर बाजार सूचकांक 41,500 के पार है। लेकिन अंत फिर विपक्ष के लिए महाराष्ट्र, झारखंड चुनाव नतीजे से भली उम्मीद लेकर आया है।

ऑपरेशन बालाकोट

भारत ने पहली बार आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पाक अधिकृत कश्मीर में वायुसेना के सीमित प्रयोग की रणनीति अपनाई। कई आतंकी ठिकाने नष्ट किए और अंतरराष्ट्रीय स्तर किसी स्थिति में आतंकवाद को न सहने का संदेश दिया। इससे पहले भारतीय सेना के पैरा कमांडोज ने 2016 में उरी में आतंकी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था।

सेना के इन दोनों बड़े अभियानों से जहां सैन्य बलों का मनोबल ऊंचा हुआ, वहीं देश के शीर्ष नेतृत्व की प्रबल राजनीतिक इच्छाशक्ति ने भारत को नई पहचान दिलाई। देशवासियों ने इसका स्वागत किया और मई 2019 के लोकसभा चुनाव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दूसरी बार 303 सीटों का प्रचंड बहुमत देकर 33 साल बाद दूसरी बार केंद्र में मजबूत सरकार बनाने का रास्ता साफ किया।

सरकार ने दिखाई राजनीतिक इच्छाशक्ति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुशल राजनीतिक समझ के साथ दृढ़ इच्छाशक्ति के लिए जाने जाते हैं। 26 मई 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस बार उन्होंने अपनी तरह ही कुशल राजनीतिक समझ रखने वाले राष्ट्रवादी सोच के दृढ़ निश्चयी इच्छाशक्ति के भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को मंत्रिमंडल में गृहमंत्री के रूप में जगह दी। रक्षा मंत्री का प्रभार राजनाथ सिंह को दिया।

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गृहमंत्री अमित शाह ने सत्ता संभालते ही कुशल राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, जम्मू-कश्मीर को केन्द्र शासित प्रदेश बनाने, लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव संसद में पेश किया। दोनों सदनों में पारित कराया, दोनों केंद्र शासित प्रदेश बने, जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त हुआ और इस पूरे अभियान में कहीं, कोई हिंसा की चिंगारी नहीं भड़की। बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ, किसी आम नागरिक को सुरक्षा बलों की गोली का निशाना नहीं बनना पड़ा।

केंद्र सरकार ने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण का काम पूरा कराया, गृहमंत्री ने 2024 से पहले देश से विदेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने की संसद में घोषणा की और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गृहमंत्री के अथक प्रयासों से नागरिक संशोधन कानून-2019 अस्तित्व में आया। कहा जा सकता है 15 अगस्त 1947 के बाद से पिछले 70 साल में संसद और देश ने राष्ट्रवाद की नई बानगी देखी।

विरोध में उतरी जनता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के लिए यह भी चुनौती पहली बार आई। संसद में नागरिकता संशोधन कानून पारित होने के बाद देश के दर्जन भर से अधिक प्रदेशों, 60 से अधिक शहरों में जनता इस कानून के विरोध में सड़क पर उतर आई। हिंसक प्रदर्शन तक हुए। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछली सरकार ने भी इतना बड़ा जनदबाव कभी नहीं झेला। इस जनदबाव के आगे सरकार ने जहां राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण के निर्णय पर अपना कदम कुछ पीछे खींचने का संकेत दिया, वहीं राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को नए तेवर के साथ लेकर आई है।

लेकिन महज छह महीने के भीतर प्रचंड बहुमत से जीतकर सत्ता में आई मोदी सरकार-2 के लिए यह समय कई संदेश लेकर आया। देश में राष्ट्रवाद की नई परिभाषा पर चर्चा ने नया आकार लेना शुरू कर दिया। कहा जा सकता है कि कई दशक के बाद देश ने न केवल दृढ़ इच्छाशक्ति के गृहमंत्री को देखा, बल्कि हर वर्ग ने महसूस भी किया। सरकार इस जनदबाव से भी बहुत अच्छे तरीके से निपटने में सफल हुई। हिंसक विरोध प्रदर्शनों को केंद्र सरकार  नेअपनी कुशलता से बहुत कम समय में काबू किया। देश में शांति बहाली के प्रयासों को मजबूत किया।

विपक्ष हताश, राहुल फेल, सोनिया पास

2019 विपक्ष के लिए खट्टा-मीठा अनुभव लेकर आया। लोकसभा चुनाव से विपक्ष को बहुत उम्मीद थी। 2018 में कांग्रेस अध्यक्ष बने राहुल गांधी ने एंग्री यंग मैन की भूमिका निभाई। सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर रक्षा घोटाले का आरोप लगाकर चौकीदार चोर कहा। लेकिन लोकसभा चुनाव 2019 ने राहुल गांधी को राजनीति में फेलकर दिया। 2014 में 44 लोकसभा सीट पाने वाली कांग्रेस 2019 में लोकसभा में विपक्षी दल बनने के लिए 10 फीसदी सीटें भी नहीं पा सकी। विपक्ष सिमट गया। तमाम दिग्गज नेता चुनाव हार गए। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी परंपरागत सीट अमेठी हार गए। चुनाव नतीजों से हताश राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, तीन महीने तक कांग्रेस बगैर अध्यक्ष के चलती रही।
 

2019 का उत्तरार्ध बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल लेकर आया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पार्टी की कार्यवाहक अध्यक्ष बनीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने संगठन में जोरदार वापसी करते हुए भाजपा के कार्यवाहक अध्यक्ष की कमान संभाली। कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा एचडी कुमारस्वामी सरकार को अपदस्थ करके खुद के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनाने में सफल रहे। महाराष्ट्र, हरियाणा में विधानसभा चुनाव हुए। हरियाणा में भाजपा को आंशिक बहुमत मिला, दुष्यंत चौटाला के साथ मिलकर राज्य सरकार बनी।

महाराष्ट्र में भारी उलट-फेर हो गया। दशकों से पारंपरिक साथी रही, विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ मिलकर लड़ने वाली शिवसेना ने भाजपा का साथ छोड़ दिया। कांग्रेस, एनसीपी से मिलकर शिवसेना ने सरकार बनाने में सफलता पाई। झारखंड विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को हार का सामना देखना पड़ा। नतीजा- कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पास हो गई। प्रधानमंत्री का महाराष्ट्र में गैर मराठा, झारखंड में गैर आदिवासी मुख्यमंत्री देखने का सपना रह गया।

अर्थव्यवस्था को लगी ठंड, शेयर बाजार मुस्कराया

2019 आर्थिक क्षेत्र के लिए भी याद किया जाएगा। अर्थव्यवस्था उत्पादन, उद्योग, विकास के मानक पर आर्थिक सुस्ती का सामना कर रही है। खुदरा मंहगाई दर, कच्चे तेल की कीमत अर्थव्यवस्था को डरा रही है। बेरोजगारी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। यह स्थिति तब है जब भारत ने पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने का सपना देखा है। डालर के मुकाबले रुपया नीचे आ रहा है। रियल एस्टेट लगातार कमजोर हो रहा है।

राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, केंद्र सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रामण्यम, रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन आर्थिक सुस्ती बढ़ने का संकेत दे रहे हैं। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक तस्वीर चमकाने में व्यस्त हैं। इन सबके  बीच भारतीय शेयर सूचकांक वैश्विक संकेतों के सहारे लगातार मुस्करा रहा है। सेंसेक्स 41,500 के सूचकांक को पार कर गया है।

 

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