विदेशी मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार इमरान खान के पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने से भारत-पाक रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलने के आसार नहीं हैं। आने वाले दिनों में भारत को पाकिस्तान से तल्ख रिश्तों का ही तोहफा मिलेगा।
पूर्व वित्त एवं विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा कहते हैं कि इमरान के आने से भारत-पाक रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रक्षा विशेषज्ञ पी.के सहगल कहते हैं कि पाकिस्तान में इमरान की नहीं आतंकियों और सेना की सरकार बनी है। इसलिए हमें और सजग रहना होगा।
पाकिस्तान में तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के मुखिया इमरान खान ने भारत के साथ अच्छे रिश्तों की वकालत की है। लेकिन उन पर फौज के साथ मिलकर राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में भारत में पूर्व वित्त तथा विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा से लेकर विदेश मामलों के जानकार पीके सहगल तक भारत पाक संबधों को लेकर इमरान की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
यशवंत सिन्हा ने इमरान के प्रधानमंत्री बनने पर तीखी प्रक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि केवल प्रधानमंत्री बदलने से किसी देश की नियत और नीति नहीं बदल जाती है। पाकिस्तान का रवैया भारत को लेकर बदला या नहीं इसका कोई संकेत नहीं है।
उन्होंने इमरान का नाम लिए बिना कहा अभी जो पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री बने हैं, उनकी जो कंपनी रही है वह जिस सोहबत में रहे हैं। उससे बहुत ज्यादा कोई उम्मीद नहीं बनती है कि वह आकर कोई बड़ा बदलाव करेंगे।
दूसरी बात यह है कि अभी पाकिस्तान से खबरे आ रही हैं। पाकिस्तान की आर्मी ने उन्हें इस पद पर बिठाया है। इसलिए वह आर्मी के कंट्रोल में चलेंगे, चरमपंथियों ने चुनाव में मदद की है। लिहाजा उनके अनुसार एक्ट करेंगे। इसलिए बहुत उम्मीद नहीं है कि भारत पाक रिश्तों में कुछ सुधार होगा।