केंद्र सरकार और राज्य सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद दिल्ली में यमुना की स्थिति नहीं सुधरी रही हैं। दिल्ली के 18 नालों से रोज 350 करोड़ लीटर गंदा पानी बगैर शोधन के यमुना में बहाया जा रहा है। यमुना की सफाई को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार पर यमुना की सफाई से संबंधित परियोजनाओं पर गंभीरता से काम नहीं करने का आरोप लगाया है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर यमुना नदी की सफाई परियोजनाओं को गंभीरता से नहीं लेने पर गहरा रोष व्यक्त किया है। केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में यमुना की सफाई के लिए केंद्र सरकार द्वारा हर मुमकिन सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन देते हुए यह उम्मीद भी जताई है कि दिल्ली सरकार इस काम को प्राथमिकता देगी।
80 फीसदी प्रदूषण के लिए दिल्ली जिम्मेदार
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने अपने पत्र में कहा है कि यमुना का केवल दो फीसदी दायरा ही दिल्ली में आता है, लेकिन यह महानगर इसके 80 फीसदी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। यमुना को देश की पवित्रतम नदियों में से एक करार देते केंद्रीय मंत्री लिखा कि केन्द्र सरकार ने इसकी सफाई के लिए विभिन्न 13 परियोजनाओं के लिए दिल्ली सरकार को 2419 करोड़ रुपए की सहायता उपलब्ध कराई इसके बावजूद नदी में प्रदूषण का जहर लगातार घुल रहा है। दिल्ली के 18 नालों से रोज 350 करोड़ लीटर गंदा पानी बगैर शोधन के यमुना में बहाया जाता है। दिल्ली में आकर यह पवित्र नदी किसी गंदे नाले में तब्दील हो गई है।
शेखावत ने केजरीवाल को उनका वह चुनावी वादा भी याद दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यमुना न केवल साफ हो जाएगी, बल्कि लोग इसके पानी में डूबकी भी लगा सकेंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी हुआ नहीं है। यमुना की सफाई के लिए निर्धारित की गई सीवर ट्रीटमेंट परियोजनाएं बहुत देरी से चल रही हैं।
उन्होंने आगे लिखा कि, केन्द्र सरकार ने दिल्ली सरकार को यमुना की सफाई से संबंधित 13 परियोजनाओं के लिए 2419 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद प्रदान की और यह तय किया गया कि इन परियोजनाओं के माध्यम से 1385 मीलियन लीटर सीवर के पानी को प्रतिदिन साफ कर यमुना में बहाया जाएगा लेकिन ये परियोजनाएं समय रहते नहीं पूरी की जा सकीं। सभी परियाजनाएं 15 से 27 महीनों की देरी से संचालित की जा रही हैं।
दिल्ली जल बोर्ड नहीं दिखा रहा तेजी
शेखावत ने कहा है कि, वर्ष 2016 में केन्द्र सरकार ने 7 करोड़ लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले कोरोनेशन पिलर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को वित्तीय मदद देने की पहल की। केंद्र सरकार ने अपने विशेषाधिकारों का प्रयोग करते हुए इस परियोजना पर खर्च होने वाली कुल राशि का 50 फीसद बोझ अपने उपर पर ले लिया ताकि इसको समय रहते पूरा किया जा सके लेकिन दिल्ली जल बोर्ड ने इस परियोजना को भी पूरा करने में कोई तेजी नहीं दिखलाई। नजफगढ़ नाले की सफाई से संबंधित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एनजीटी ने महज दो वर्ष का ही समय निर्धरित किया था लेकिन चार साल की देरी हो जाने के बाद इन परियोजनाओं को नहीं पूरा किया जा सका है।
उद्योगों को कचरा बिना शोधन के यमुना में बहा रहे
शेखावत ने छतरपुर में नौ विकेन्द्रीकृत सीवर ट्रीटमेंट प्लांटों के निर्माण को मंजूरी दिए जाने के बावजूद नहीं शुरू किए जाने और इंटरसेप्टर सीवर परियोजनाओं में देरी का मामला भी उठाया है और इनको नहीं पूरा किए जाने पर अपनी अप्रसन्नता जताई है। उन्होंने दिल्ली के उद्योगों से निकलने वाले कचरे को बगैर उचित शोधन के यमुना में बहाए जाने पर भी अपनी चिंता जताई है।