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Karnataka High Court: 'सरकारी अफसर 'टॉम, डिक और हैरी'; एक्स के वकील के ऐसा कहने पर बिफरे जज, सरकार का भी एतराज

Tue, 01 Jul 2025 11:13 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।

सार

Karnataka High Court: कर्नाटक हाईकोर्ट में एक्स के वकील ने कहा कि अगर हर सरकारी अधिकारी कंटेंट हटाने का आदेश देने लगे तो यह शक्तियों का दुरुपयोग होगा। 'टॉम, डिक और हैरी' शब्द के इस्तेमाल पर केंद्र सरकार और अदालत ने आपत्ति जताई। कोर्ट ने अंतिम सुनवाई 8 जुलाई को तय की है और सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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अरबपति कारोबारी एलन मस्क की कंपनी एक्स (पहले ट्विटर) के एक वकील ने कर्नाटक हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि अगर हर 'टॉम, डिक और हैरी' सरकारी अधिकारी को कंटेंट हटाने का नोटिस भेजने का अधिकार दिया गया, तो यह सरकारी शक्तियों के दुरुपयोग जैसा होगा। इस टिप्पणी पर केंद्र सरकार और न्यायाधीश दोनों ने कड़ी आपत्ति जताई।
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यह मामला तब उठा जब एक्स कॉर्प इंडिया ने कोर्ट को बताया कि उसे हाल ही में रेल मंत्रालय से एक वीडियो हटाने का नोटिस मिला, जिसमें हैदराबाद में एक महिला रेलवे ट्रैक पर कार चलाती दिख रही है। सुनवाई के दौरान एक्स कॉर्प की ओर से पेश वरिष्ठ वकील के.जी. राघवन ने सवाल उठाया कि क्या हर सरकारी अधिकारी को आईटी अधिनियम के तहत ऐसा नोटिस भेजने का अधिकार है। उन्होंने कहा, अगर हर टॉम, डिक और हैरी अधिकारी मुझे नोटिस भेजने लगे, तो सोचिए इसका कैसे दुरुपयोग होगा।

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राघवन ने यह भी सवाल किया कि क्या ऐसा कंटेंट गैरकानूनी माना जा सकता है। उन्होंने कहा, 'कोई महिला रेलवे ट्रैक पर कार चला रही थी। जैसे कुत्ते के काटने की खबर आम है, लेकिन आदमी के कुत्ते को काटने की खबर खास बनती है।' इस पर भारत सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, वे अधिकारी हैं, कोई टॉम, डिक और हैरी नहीं। उनके पास विधिक अधिकार हैं। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को इतना अहंकार नहीं दिखाना चाहिए। 

जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने भी टिप्पणी पर नाराजगी जताई और कहा, मैं इस पर आपत्ति जताता हूं। ये भारत सरकार के अधिकारी हैं। एक्स कॉर्प ने अदालत से कहा कि आईटी अधिनियम की धारा 79(3) (बी) के तहत हर सरकारी अधिकारी को कंटेंट ब्लॉक करने का अधिकार नहीं है। ऐसा आदेश सिर्फ धारा 69ए और संबंधित नियमों के अनुसार ही दिया जाना चाहिए। कंपनी ने यह भी अपील की है कि सरकार की ओर से जब तक सही प्रक्रिया न अपनाई जाए, तब तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो।

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वरिष्ठ वकील आदित्य सोंधी डिजिटल मीडिया हाउसों के समूह की ओर से पेश हुए। उन्होंने कहा कि कंटेंट हटाने के आदेश से सामग्री निर्माता प्रभावित होते हैं। जब कोर्ट ने पूछा कि सरकार और एक्स के मामले में उन्हें कैसे आपत्ति हो सकती है, तो उन्होंने कहा कि इस तरह के आदेश उनकी प्रकाशित सामग्री पर सीधा असर डालते हैं। तुषार मेहता ने इस हस्तक्षेप का विरोध करते हुए कहा कि एक्स एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय कंपनी है और उसे किसी तीसरे पक्ष के समर्थन की जरूरत नहीं है।

कोर्ट ने अंतिम सुनवाई की तारीख 8 जुलाई तय की है और एक्स कॉर्प को याचिका में विभिन्न मंत्रालयों को जोड़ने की अनुमति दी है। साथ ही केंद्र सरकार को उस आवेदन पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

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