बीते 10 साल में बच्चों से दुष्कर्म मामलों में 290 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इनमें से 64 फीसदी पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। यह खुलासा प्रोत्साहन इंडिया फाउंडेशन की रिपोर्ट में हुआ है, जिसे सोमवार को जारी किया गया।
क्या है पॉक्सो अधिनियम
यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 : साल 2007 में महिला व बाल विकास मंत्रालय ने बाल शोध अध्ययन रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए एक सख्त कानून लागू करने की सिफारिश की गई। इसके बाद यह अधिनियम लागू हुआ था।
2014 में अर्थशास्त्री इंटेलिजेंस यूनिट लंदन की ओर से एक विश्लेषण प्रकाशित किया गया था... जिसमें भारत के पॉक्सो अधिनियम को सबसे अच्छा कानूनी ढांचा माना गया। यूके, ऑस्ट्रेलिया और स्वीडन जैसे देशों से ज्यादा बेहतर स्थिति में भारत को रखा गया।
ज्यादातर मामलों में करीबी लोग जिम्मेदार
चाइल्ड केयर सर्विसेज के विपुल यश बताते हैं कि हर साल लाखों बच्चे यौन शोषण का सामना कर रहे हैं। अध्ययन बताते हैं कि सबसे अधिक दुर्व्यवहार ऐसे व्यक्ति के हाथों होता है, जिसे बच्चा घर, स्कूल या आसपास नजदीकी से जानता हो, उस पर भरोसा करता हो। हालांकि, यह भी तथ्य है कि सुरक्षा के बिना डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग ने भी बच्चों को जोखिम में डाला है।