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चिंताजनक : 290 फीसदी बढ़े बच्चों से दुष्कर्म... 64% को न्याय का इंतजार, पॉक्सो अधिनियम के 10 वर्ष हुए पूरे

Tue, 15 Nov 2022 05:48 AM IST
योगेश साहू परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

विशेषज्ञों के अनुसार, घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन दर्ज मामलों के बढ़ते आंकड़े लोगों में कानूनी जागरूकता के संकेत भी हैं। अभी भी काफी मामले दर्ज नहीं हो पाते हैं या पुलिस स्टेशन तक नहीं पहुंच पाते।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बीते 10 साल में बच्चों से दुष्कर्म मामलों में 290 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इनमें से 64 फीसदी पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। यह खुलासा प्रोत्साहन इंडिया फाउंडेशन की रिपोर्ट में हुआ है, जिसे सोमवार को जारी किया गया। 

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प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट (पॉक्सो अधिनियम) के 10 वर्ष पूरे होने पर इस कानून के तहत 2012 से अब तक दर्ज घटनाओं की समीक्षा के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2012 में बच्चों से दुष्कर्म के 8,541 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2021 में इनकी संख्या 83,348 हो गई।
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99 फीसदी घटनाओं में पीड़ित बच्चियां
‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम’ नाम से जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से अब तक बच्चों के खिलाफ यौन शोषण के 1,26,767 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 1,25,560 यानी 99% घटनाओं में पीड़ित मासूम बच्चियां हैं। फाउंडेशन की सोनल कपूर ने कहा, 2012 में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण के लिए पॉक्सो अधिनियम अस्तित्व में आया था। इस कानून को 10 वर्ष पूरे हुए हैं। इसके तहत अब तक देश में क्या तस्वीर बदली है? यह जानने के लिए कानूनी आंकड़ों की समीक्षा के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है।

  • 12.1 बच्चे यौन हिंसा के शिकार हुए प्रति एक लाख आबादी पर साल 2021 में... इनमें 52,836 लड़कियां और 1,038 लड़के शामिल
  • 2019 : एक लाख की आबादी पर 10.6 बच्चे यौन हिंसा के शिकार हुए जिनमें 46,005 लड़कियां और 1,330 लड़के पीड़ित थे।
  • 2020 : एक लाख की आबादी पर 10.6 बच्चे पीड़ित थे जिनमें 46,123 लड़कियां, 1,098 लड़के शामिल थे।

क्या है पॉक्सो अधिनियम
यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 :
साल 2007 में महिला व बाल विकास मंत्रालय ने बाल शोध अध्ययन रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए एक सख्त कानून लागू करने की सिफारिश की गई। इसके बाद यह अधिनियम लागू हुआ था।

2014 में अर्थशास्त्री इंटेलिजेंस यूनिट लंदन की ओर से एक विश्लेषण प्रकाशित किया गया था... जिसमें भारत के पॉक्सो अधिनियम को सबसे अच्छा कानूनी ढांचा माना गया। यूके, ऑस्ट्रेलिया और स्वीडन जैसे देशों से ज्यादा बेहतर स्थिति में भारत को रखा गया।

ज्यादातर मामलों में करीबी लोग जिम्मेदार
चाइल्ड केयर सर्विसेज के विपुल यश बताते हैं कि हर साल लाखों बच्चे यौन शोषण का सामना कर रहे हैं। अध्ययन बताते हैं कि सबसे अधिक दुर्व्यवहार ऐसे व्यक्ति के हाथों होता है, जिसे बच्चा घर, स्कूल या आसपास नजदीकी से जानता हो, उस पर भरोसा करता हो। हालांकि, यह भी तथ्य है कि सुरक्षा के बिना डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग ने भी बच्चों को जोखिम में डाला है। 

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...जागरूक हो रहे लोग
विशेषज्ञों के अनुसार, घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन दर्ज मामलों के बढ़ते आंकड़े लोगों में कानूनी जागरूकता के संकेत भी हैं। अभी भी काफी मामले दर्ज नहीं हो पाते हैं या पुलिस स्टेशन तक नहीं पहुंच पाते।

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