यह कहानी है जंगल के उन हीरो की, जिन्होंने बाघों को बचाने के लिए एक लाख किलोमीटर से ज्यादा का जंगलों के बीच में सफर किया। आंधी, बारिश और तूफान के बीच खतरों से जूझते हुए भारतीय वन सेवा के अधिकारी रमेश पांडे और उनकी टीम ने वीरान और बियावान जंगलों में दिन-रात एक कर सफर तय किया ताकि देश में बाघों का कुनबा बढ़ाया जा सके। देश में टाइगर की दहाड़ सुनाई पड़ती रहे इसके लिए इस आईएफएस ऑफिसर ने अपनी टीम को कई अनोखे प्रयोग कराए। जिसका नतीजा टाइगर के बढ़े हुए कुनबे के तौर पर सामने आया। यूनाइटेड नेशन ने बाघों के कुनबे को बचाने और उनको बढ़ाने के सफल प्रयासों के लिए भारतीय वन सेवा के अधिकारी रमेश पांडे को एशिया एनवायरनमेंट एनफोर्समेंट अवार्ड से भी नवाजा। विश्व बाघ दिवस पर जानते हैं इस ऑफिसर की अनकही कहानी कि कैसे दिन और रात, महीनों और साल लगकर दुधवा नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क में बाघों का कुनबा बढ़ाया गया।
भारतीय वन सेवा के अधिकारी रमेश कुमार पांडे बताते हैं दुनिया के 75 फीसदी बाघ भारत मे ही हैं। बाघों को बचाना एक बहुत बड़ी चुनौती रहा है। उन्होंने बताया तराई के जंगलों में बाघों को बचाने के लिए कुछ अलग प्रयास करने शुरू किए। इसके लिए एम स्ट्राइप नाम के एक मोबाइल एप का इस्तेमाल किया गया। वह बताते हैं कि वह स्वयं और उनकी वन विभाग की टीम ने महीनों तराई के जंगलों में दिन-रात पैदल पेट्रोलिंग करके एक लाख किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय किया। इस दौरान बाघों के संरक्षण और उनके कुनबे को बढ़ाने के लिए किए जाने वाले प्राकृतिक प्रयासों और उनके प्राकृतिक घरों को बढ़ाया गया।