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30 साल में तिगुना बढ़ी तपिश: दुनिया के बड़े शहरों में गर्मी का कहर, 26 फीसदी ज्यादा बढ़े झुलसाने वाले दिन

Tue, 30 Sep 2025 03:35 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Climate Crisis: दुनिया के बड़े शहर अब पहले से कहीं ज्यादा तपती गर्मी झेल रहे हैं। बीते 30 वर्षों में इन शहरों में बेहद गर्म दिनों (35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर) की संख्या औसतन 26% बढ़ी है। यह रिसर्च ब्रिटेन के इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट ने किया है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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दुनिया के बड़े शहरों में झुलसाने वाली गर्मी तेजी से बढ़ रही है, इसका खुलासा एक नए अध्ययन से हुआ है। इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर एनवायरनमेंट एंड डेवलपमेंट (आईआईईडी) की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में बेहद गर्म दिनों (35°C से ऊपर) की संख्या औसतन 26% बढ़ गई है। 1994 से 2003 के बीच जहां हर साल औसतन 1062 दिन इतने गर्म रहते थे, वहीं 2015 से 2024 में यह संख्या 1335 हो गई।
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दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे लोग
साल 2024 सबसे ज्यादा तपता हुआ साल रहा, जिसमें 1612 बेहद गर्म दिन दर्ज किए गए, यह 1994 की तुलना में 52 फीसदी ज्यादा है। वहीं दिल्ली समेत दुनिया के कई शहरों में झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि वहां मकान और बुनियादी ढांचा गर्मी झेलने लायक नहीं हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो करोड़ों लोग शहरों में खतरनाक हालात का सामना करेंगे।
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किन शहरों पर सबसे ज्यादा असर?
दिल्ली जैसे शहरों में, जहां आबादी 2013 से अब तक आधी से ज्यादा बढ़ चुकी है, गर्मी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में 1994-2003 के बीच केवल 3 दिन 35 डिग्री से ऊपर गए थे, लेकिन हाल की एक दशक में यह संख्या 40 हो गई। साओ पाउलो जैसे ठंडे माने जाने वाले शहर में 2024 में ही 30 डिग्री से ऊपर के 120 दिन दर्ज हुए। रोम (इटली) में पहले 11 दिन ही इतने गर्म होते थे, जो अब बढ़कर 24 हो गए। मैड्रिड (स्पेन) में यह औसत 25 से बढ़कर 47 दिन हो गया। बर्लिन (जर्मनी) ने भी अधिक गर्म दिनों का अनुभव किया। 2024 में अंटानानारिवो (मेडागास्कर), काहिरा (मिस्र), जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका), किंशासा (डीआर कांगो), मनीला (फिलीपींस), रोम (इटली), टोक्यो (जापान), वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) और याओंडे (कैमरून) में रिकॉर्ड गर्मी दर्ज की गई।

बढ़ती गर्मी को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी
आईआईईडी की शोधकर्ता अन्ना वाल्निकी ने कहा कि ग्लोबल तापमान सरकारों की उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है, और वे उसके मुताबिक कदम उठाने में पीछे हैं। उन्होंने कहा कि यदि तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो करोड़ों लोग शहरों में और भी खतरनाक हालात झेलेंगे, क्योंकि 'अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट' (शहरों में कंक्रीट और भीड़भाड़ के कारण और ज्यादा गर्मी महसूस होना) स्थिति को और बिगाड़ रहा है।

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गरीबों को सबसे ज्यादा खतरा-  IIED
रिसर्च के अनुसार, दुनिया की लगभग एक-तिहाई शहरी आबादी झुग्गी-बस्तियों में रहती है। खराब घर, कमजोर ढांचा और पक्के ठिकानों की कमी उन्हें सबसे ज्यादा जोखिम में डालती है। अमीर देशों के शहरों जैसे लंदन में भी असर दिखेगा, लेकिन गरीब देशों के शहरों जैसे लुआंडा (अंगोला) या लीमा (पेरू) में हालात कहीं ज्यादा खराब होंगे।

क्या करना जरूरी है?
आईआईईडी का सुझाव है कि शहरों को तुरंत- घरों में बेहतर हवा की व्यवस्था करनी होगी, गर्मी से निपटने की योजना भी बनानी होगी, इसके साथ ही जगह-जगह छाया और हरियाली बढ़ानी होगी और नई इमारतों को बढ़ती गर्मी के हिसाब से तैयार करना होगा। रिसर्च के मुताबिक जिन 43 शहरों का डेटा देखा गया, वहां आज करीब 47 करोड़ लोग रहते हैं और आने वाले दशकों में यह संख्या और बढ़ने वाली है। यानी गर्मी का संकट और बड़ा होगा।
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