अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर डिपार्टमेंट ऑफ साइकेट्री डाक्टर सोनाक्षी का कहना है कि कोई भी लत छोड़ने के लिए खुद को दिमागी तौर पर तैयार करना सबसे पहला कदम है। उन्होंने इस बुरी लत को छोड़ने के इच्छुक लोगों को कुछ छोटे छोटे उपाय बताए। उनके अनुसार ''एक समय में एक सिगरेट ही खरीदें, एक बार में पूरी सिगरेट पीने के बजाय आधी पीकर बाकी छोड़ देने की आदत डालें, इसे छोड़ने की कोई तारीख निश्चित कर लें या शुरू में सप्ताह में एक दिन न पीने का प्रण लें और धीरे धीरे एक से दो दिन और फिर दो से तीन दिन पर आएं। इन उपायों के अलावा निकोटिन च्यूइंग-गम चबाना भी तम्बाकू की तलब नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।''
दिल्ली मधुमेह अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. ए के झींगन इस संबंध में बताते हैं कि धूम्रपान करने वाले लोगों के लिए कोविड-19 के अधिक घातक होने की बड़ी वजह यही है कि उनका शरीर वायरस के हमले का प्रतिरोध नहीं कर पाता और फेफड़े कमजोर होने के कारण उन्हें ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की जरूरत अन्य लोगों से ज्यादा होती है।
धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल में निदेशक सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, डॉक्टर अंशुमन कुमार के मुताबिक, कोविड महामारी के दौर में पोस्ट कोविड सिंड्रोम एक अतिरिक्त समस्या के रूप में उभरा है। संक्रमण से मुक्त होने के बाद धूम्रपान फेफड़ों की हीलिंग पॉवर यानी ठीक होने की शक्ति को कम कर सकता है, कोविड का नसों और मासंपेशियों पर होने वाला असर धूम्रपान के कारण और भी गंभीर हो सकता है क्योंकि तम्बाकू भी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। अगर तीन इंच की तंबाकू भरी सिगरेट इतनी नुकसानदेह हैतो इससे तौबा करने का विश्व तंबाकू निषेध दिवस से बेहतर मौका शायद ही कोई और हो।