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World City: दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने का सपना कैसे होगा साकार, इन चुनौतियों से कैसे निपटेगी सरकार?

Tue, 21 Oct 2025 02:36 PM IST
अमित शर्मा डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय स्तर के शहर न्यूयॉर्क, लंदन, बीजिंग या पेरिस जैसा बनाने के लिए सरकार को बड़ी मेहनत करनी होगी। दिवाली के एक दिन बाद दिल्ली की जो स्थिति है, वो न सिर्फ चिंताजनक है बल्कि चौंकाने वाली भी है। वहीं दिल्ली का ट्रैफिक जाम भी लाइलाज है।
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दिल्ली में दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर - फोटो : ANI
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में राजधानी दिल्ली को एक वैश्विक स्तर का शहर बनाने का सपना लोगों को दिखाया था। उनके कहने का आशय था कि दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय स्तर के शहर न्यूयॉर्क, लंदन, बीजिंग या पेरिस जैसा विकसित, सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त, प्रदूषण मुक्त और खूबसूरत होना चाहिए। चूंकि, पीएम मोदी ने गुजरात में केवड़िया से लेकर कच्छ तक राज्य के बेहद पिछड़े इलाकों को विकसित करने का करिश्मा कर दिखाया है, अहमदाबाद में गंदगी से बजबजाती साबरमती नदी साफ कर उसे पर्यटन केंद्र बनाकर दिखाया है, दिल्ली के लोगों ने भी 'ब्रांड मोदी' पर भरोसा करते हुए भाजपा को सत्ता सौंप दी। दिल्ली में सत्ता पाने के साथ ही भाजपा और 'ब्रांड मोदी' की विश्वसनीयता की चुनौती शुरू हो चुकी है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि गंभीर प्रदूषण और भयंकर ट्रैफिक जाम के बीच दिल्ली को विकसित करने की चुनौती आसान नहीं है।
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दिल्ली में भाजपा को जल्द लेना होगा एक्शन
भाजपा अपने हर चुनाव में यह दावा करती है कि उसने जनता से किया गया हर वादा निभाया है। उसका यह वादा लोकसभा चुनावों में भी दिखता है और राज्यों के चुनावों में भी। बिहार के इस समय चल रहे चुनाव में भी भाजपा यही दावा कर रही है कि एनडीए सरकार ने अपने किए हर वादे को निभाया है। यदि भाजपा को दिल्ली में अपनी यह विश्वसनीयता बरकरार रखनी है, और दो साल बाद दिल्ली नगर निगम 2027 के चुनावों में मजबूती से उतरना है तो उसे अपने वादों पर काम करते हुए दिखना भी होगा। कम से कम जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि भाजपा जनता से किए अपने वादों को पूरा करने के लिए पूरी ईमानदारी के साथ काम कर रही है।
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दिल्ली सरकार के कार्यों में दिख रहा ऊपरी नजर का असर
दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार जिस तरीके से काम कर रही है, राजधानी की व्यवस्था को सुधारने के लिए जिस तरह दिन-रात प्रयास किए जा रहे हैं, उससे भी यह लगता है कि भाजपा को अपनी जिम्मेदारियों का भान है। माना यह भी जाता है कि दिल्ली सरकार के कामकाज पर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की गहरी नजर है। चर्चा यहां तक है कि प्रधानमंत्री कार्यालय और अमित शाह स्वयं रुचि लेकर दिल्ली के विकास कार्यों की योजना बनाने से लेकर उसे पूरा करने में जुटे हुए हैं। दिल्ली सरकार के नेताओं-अधिकारियों की सक्रियता इसी 'ऊपरी नजर' का परिणाम हो सकती है।

लेकिन दिल्ली की चुनौती कम नहीं
लेकिन दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय स्तर के शहर के रूप में विकसित करना आसान नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यमुना को छोड़ दें तो दिल्ली के पास अपना ऐसा कोई प्राकृतिक संसाधन नहीं है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। दिल्ली की सबसे बड़ी समस्या इसके बहुत कम क्षेत्रफल (1484 वर्ग किमी) में बहुत अधिक आबादी (लगभग 2.5 करोड़) का होना भी है। राजधानी का बहुत अधिक क्षेत्र केंद्र सरकार की गतिविधियों-निर्माण, सेना-रेलवे की भूमि और एएसआई द्वारा संरक्षित भी है। ऐसी परिस्थिति में अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटकों का ध्यान खींचने के लिए नए निर्माण करना कठिन कार्य है। 

दिल्ली कर रही अपनी सॉफ्ट पॉवर का इस्तेमाल 
लेकिन एक तरफ जहां अतिरिक्त भूमि का न होना दिल्ली के लिए चुनौती है, वहीं उसकी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वरदान का काम कर सकती है। दिल्ली में मुगलकालीन ऐतिहासिक इमारतों की लंबी श्रृंखला है। लेकिन दिल्ली अपनी पहचान के लिए केवल मुगल या स्वतंत्रता कालीन इतिहास पर निर्भर नहीं है। महाभारत काल की समृद्ध गाथा भी पर्यटकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकती है। 

सॉफ्ट पॉवर को सुपर पॉवर बनाने की योजना
रेखा गुप्ता सरकार ने जिस तरह इंडिया गेट के पास कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) पर दिवाली पर लाखों दिए जलाने की शुरुआत की है, यमुना आरती के साथ-साथ जिस तरह छठ को व्यापक स्तर पर मनाने का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, उससे यह संकेत साफ समझ आता है कि दिल्ली को भी गुजरात की तर्ज पर उसकी सॉफ्ट पॉवर का उपयोग करते हुए विकसित करने की योजना बनाई जा चुकी है। दिल्ली सरकार ने जिस तरह साल में करीब 80 दिन राजधानी में विशेष सांस्कृतिक उत्सव मनाने की योजना तैयार हो चुकी है, उससे भी यह संकेत मिलता है कि दिल्ली को विकसित करने के लिए पीएमओ ने सॉफ्ट पॉवर को ही सुपर पॉवर बनाने की रणनीति अपनाई है।   

शेष भारत घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए दिल्ली पहला प्वाइंट बनती है। आसपास में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, कश्मीर, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश घूमने के लिए आने वाले पर्यटक भी दिल्ली होकर ही वहां पहुंचते हैं। ऐसे में दिल्ली को भी सनातन धर्म-संस्कृति के पैटर्न पर विकसित कर इसका लाभ उठाया जा सकता है।  
 
प्रदूषण और गंभीर ट्रैफिक जाम में कैसे आएंगे पर्यटक
लेकिन दिल्ली की असली समस्या गंभीर प्रदूषण और कभी न खत्म होने वाला जाम है। केंद्र सरकार के साथ-साथ दिल्ली सरकार को भी समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटक प्रदूषण जैसे मामलों में बहुत गंभीर होता है। दिल्ली में अक्टूबर से फरवरी के बीच जिस समय सांस्कृतिक उत्सव मनाने की तैयारी है, लगभग उसी समय पर दिल्ली में प्रदूषण अपने सबसे विकराल रूप में होता है।

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दिखावटी उपायों से नहीं चलेगा काम
दिल्ली में यदि दिवाली, कर्तव्य पथ पर दीपोत्सव और छठ को पर्यटन की गतिविधि बनाना है तो यह काम प्रदूषण के रहते नहीं हो सकता। 20 अक्टूबर की  दिवाली के ठीक अगले दिन 21 अक्टूबर को जगह-जगह पर एक्यूआई का स्तर 400 अंक को पार कर गया है। यमुना में प्रदूषण के कारण जगह-जगह झाग बन रहे हैं। छठ को सफलतापूर्वक संपन्न कराने की कोशिश में इस पर रसायनों का छिड़काव कराया जा रहा है। लेकिन सरकार को समझना होगा कि ये उपाय वायु प्रदूषण को रोकने के स्थायी समाधान नहीं हो सकते। इसके लिए उसे स्थाई समाधान खोजना होगा। चूंकि, दिल्ली में वायु प्रदूषण का बड़ा हिस्सा पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं के जरिए आता है, केंद्र सरकार को राज्यों से मिलकर इसका स्थाई समाधान करना होगा।  

सार्वजनिक परिवहन को सस्ता-सुलभ बनाये सरकार
प्रदूषण की तरह दिल्ली का ट्रैफिक जाम भी लाइलाज लगता है। इससे निपटने के लिए सरकार को लीक से हटकर कड़े और प्रभावी इंतजाम करने होंगे। लोगों को सार्वजनिक साधन सुलभ बनाना होगा, अन्यथा कारों की बढ़ती संख्या महामारी बनकर सरकार के हर उपाय को बौना साबित कर देगी। सरकार को निजी वाहनों की संख्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए कड़े उपाय भी आजमाने से परहेज नहीं करना चाहिए। इसी तरह सरकार को दिल्ली की जल और ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक नीति तैयार करनी चाहिए जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को यहां आसानी से आकर्षित किया जा सके।  
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