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World Book Fair: भारी संख्या में पहुंच रहे पुस्तक प्रेमी, राजनीति-अध्यात्मिक पुस्तकों में दिखा युवाओं का रुझान

Sun, 11 Jan 2026 05:56 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रविवार का दिन होने के कारण आज विश्व पुस्तक मेले में भारी संख्या में लोग पहुंचे। लोग अपने बच्चों के साथ पुस्तक मेले में पहुंच रहे हैं और नई पीढ़ी को भी पुस्तकों से अवगत करा रहे हैं। इससे नई पीढ़ी का भी पुस्तकों से जुड़ाव हो रहा है।
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विश्व पुस्तक मेला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नई दिल्ली के भारत मंडपम में इस समय विश्व पुस्तक मेला चल रहा है। मेले में इस बार भारी संख्या में दर्शक पहुंच रहे हैं। युवाओं में करियर, राजनीतिक और आध्यात्मिक विषयों की पुस्तकों के बारे में विशेष झुकाव देखा जा रहा है। मेले में पहुंच रहे पुस्तक प्रेमियों में इस बात की बहुत खुशी दिखाई पड़ी कि लोगों में पुस्तकों के प्रति रुझान एक बार फिर बढ़ रहा है। हालांकि, कुछ पुस्तक प्रेमियों ने इस बात की भी शिकायत की कि पुस्तकों के मूल्य बहुत ऊंचे हैं जिससे वे आम लोगों की खरीद क्षमता के बाहर हैं। 

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रविवार का दिन होने के कारण आज विश्व पुस्तक मेले में भारी संख्या में लोग पहुंचे। लोग अपने बच्चों के साथ पुस्तक मेले में पहुंच रहे हैं और नई पीढ़ी को भी पुस्तकों से अवगत करा रहे हैं। इससे नई पीढ़ी का भी पुस्तकों से जुड़ाव हो रहा है। मीनाक्षी तिवारी ने अमर उजाला से कहा कि इस मेले में लोगों की भीड़ देखकर खुशी हो रही है। स्मार्टफोन और लैपटॉप के आने के बाद लोग पुस्तकों से बहुत दूर होते जा रहे हैं। लेकिन मेले में युवाओं और बच्चों की बड़ी संख्या में हिस्सेदारी यह बता रही है कि लोग पुस्तकों की उपयोगिता के बारे में जागरूक हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल पुस्तकों की जगह लोगों को भौतिक रूप में पुस्तकों का आनंद लेना चाहिए। यह बिल्कुल अलग और विशिष्ट अनुभव होता है।   

एक युवा मनीष शर्मा ने कहा कि विश्व पुस्तक मेले में पुस्तकों के कुछ सस्ते मूल्य पर मिलने की संभावना रहती है। लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी पुस्तकें बाजार मूल्य पर ही उपलब्ध हैं। कुछ पुस्तकों के मूल्य बहुत अधिक हैं जिससे चाहकर भी लोग उन्हें खरीद नहीं पा रहे हैं। लेकिन विश्व साहित्य के बारे में जानने के लिए यहां काफी कुछ है। 
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यथार्थ गीता के स्टॉल पर मौजूद डॉ. प्रदीप पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि लोगों की सोच से उलट इस समय की युवा पीढ़ी आध्यात्मिक विषयों में भी खूब रुचि ले रही है। हो सकता है कि वर्तमान रहन-सहन और जीवन शैली में लगातार पैदा हो रहा तनाव इसका सबसे बड़ा कारण हो। लोगों को परिवार से लेकर करियर तक के मामलों में लगातार मानसिक दबाव और संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों को स्वाभाविक तौर पर मानसिक शांति पाने की चाह बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक पुस्तकों की खरीद के बारे में सबसे ज्यादा पूछताछ युवा ही कर रहे हैं। 

शांतिकुंज के स्टॉल पर आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि उनके आध्यात्मिक गुरु पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने जीवन के लगभग हर विषय पर तीन हजार से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। विभिन्न भाषाओं में ये सभी पुस्तकें स्टॉल पर मौजूद हैं। लोगों में जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण विकसित करने के लिए इन पुस्तकों का योगदान अद्भुत है। उन्होंने कहा कि भारी संख्या में इन स्टॉलों पर युवा, महिलाएं और बच्चे पहुंच रहे हैं।  

पुस्तकों की खरीद के साथ गुनगुनी धूप में लजीज व्यंजनों का स्वाद भी
रविवार के दिन राजधानी में तेज धूप खिली रही। इससे पुस्तक मेले में पहुंचने वालों का मजा दो गुना हो गया। लोगों ने अपनी पसंद की पुस्तकों की खरीद के साथ-साथ गुनगुनी धूप में बैठकर विभिन्न राज्यों के फूड स्टॉल पर जाकर लजीज व्यंजनों का स्वाद भी लिया।  

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