विश्व बैंक ने बताया कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एयर क्वालिटी एक्शन प्लान बनाया गया है। साथ ही उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए एक विस्तृत रीजनल एयरशेड एक्शन प्लान भी बनाया गया है।
भारत में वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है। ऐसे में विश्व बैंक ने भारत में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एक योजना बनाई है। विश्व बैंक ने बताया कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एयर क्वालिटी एक्शन प्लान बनाया गया है। साथ ही उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए एक विस्तृत रीजनल एयरशेड एक्शन प्लान भी बनाया गया है। बता दें कि सिर्फ साल 2019 में भारत में वायु प्रदूषण से करीब 16 लाख लोगों की जान गई है।
विज्ञापन
वायु प्रदूषण के नुकसान बड़े
आंकड़ों से पता चलता है कि प्रत्येक भारतीय का स्वास्थ्य हवा की खराब गुणवत्ता के चलते प्रभावित हो रहा है। बता दें कि 2.5 माइक्रोन से कम व्यास वाले कणों को पर्टिकुलेट मैटर 2.5 कहा जाता है और यह इंसानी सेहत के लिए बेहद हानिकारक हैं। इनसे फेफड़ों का कैंसर, स्ट्रोक, दिल की बीमारी होने का खतरा है। बता दें कि सिर्फ साल 2019 में भारत में वायु प्रदूषण से करीब 16 लाख लोगों की जान गई है। वायु प्रदूषण से देश की अर्थव्यवस्था को करीब 36.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है जो कि भारत की कुल जीडीपी के 1.36 प्रतिशत के बराबर है।
भारत में वायु प्रदूषण की प्रमुख वजहों में जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल, पराली जलाना और निर्माण स्थलों और उद्योगों से हवा में मिलने वाला प्रदूषण प्रमुख है। बता दें कि भारत सरकार ने भी वायु प्रदूषण से निपटने के लिए 15वें वित्त आयोग में 1.7 अरब डॉलर आवंटित किए हैं। ये रकम देश के 42 शहरों में वायु प्रदूषण से निपटने में खर्च किए जाएंगे। विश्व बैंक ने चीन और मैक्सिको में भी वायु प्रदूषण से बचाने के लिए योजनाएं लागू की हैं।