उड़ी में हुए आतंकी हमले में 18 जवानों की शहादत से देश गमगीन है। लोगों में शहीदों के प्रति संवेदनाओं का ज्वार उमड़ रहा है, लेकिन कई सैनिकों से किए गए सरकारी वायदे अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। चंपावत में वीरचक्र विजेता सैनिक को दान दी गई जमीन पर सरकार कब्जा नहीं दिला पाई है। कुछ महीने पूर्व दूसरी जगह जमीन आवंटित करने की मुख्यमंत्री हरीश रावत की स्वीकृति भी हवा-हवाई साबित हुई।
टनकपुर के सूबेदार चंद्री चंद ने 1948 में पाकिस्तान की ओर से किए गए हमले में अतुलनीय पराक्रम दिखाया था। इस अदम्य साहस के लिए राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उनको सन् 1950 में वीर चक्र से सम्मानित किया था। सन् 1978 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा छह अन्य पूर्व सैनिकों के साथ चंद्री चंद को खटीमा तहसील के बिल्हेरी गांव में 20 बीघा जमीन पुरस्कार के तौर पर दी गई थी।
संबंधित कागजात तो मिले लेकिन जमीन नहीं मिली। नवंबर 2007 में आखिरी सांस लेने से पूर्व तक वे इस जमीन के लिए लड़ते रहे। चंद्री चंद के बेटे किशन चंद बताते हैं कि जमीन पर पहले से ताकतवर लोगों का कब्जा था। जमीन हासिल करने के लिए उन्होंने अधिकारियों से लेकर राष्ट्रपति तक से फरियाद की, लेकिन जमीन नहीं मिली।
इस वर्ष मार्च में चंद्री चंद के सैनिक बेटे राजेंद्र चंद ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आवंटित जमीन को गृह जिले चंपावत में उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। सीएम हरीश रावत ने स्वीकृति दी और प्रशासन को कार्यवाही के निर्देश दिए। मगर अभी तक इस पर आगे कार्यवाही नहीं हो सकी है।
फौज का जुनून अब भी बरकरार
जीवनभर तंग हाल रहे वीरचक्र विजेता चंद्री चंद के बेटे में भी सैनिक के रूप में देश की सेवा करने का जुनून है। छोटा बेटा भी फौजी है। दूसरा बेटा किशन खेती के अलावा होटल का कामकाज देखते हैं।
‘मुख्यमंत्री के आदेश के मुताबिक वीरचक्र विजेता चंद्री चंद को चंपावत जिले में जमीन देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। राजस्व उप निरीक्षक को भूमि का चयन कर प्रस्ताव देने के निर्देश दिए गए हैं।’
- नरेश दुर्गापाल (उप जिलाधिकारी, टनकपुर)