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न्याय के लिए अदालत पहुंची महिला सैन्य अधिकारी का न हो उत्पीड़न : सुप्रीम कोर्ट

Thu, 24 Jan 2019 05:44 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने तबादले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली महिला सैन्य अधिकारी को थोड़ी राहत दे दी। शीर्ष अदालत ने सेना को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि महिला सैन्य अधिकारी का किसी भी तरीके से उत्पीड़न नहीं किया जाए।

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लेफ्टिनेंट कर्नल पद पर तैनात अनु डोगरा दो वर्ष की बच्ची की मां हैं और उन्होंने अपने तबादले का यह कहकर विरोध किया था कि वहां बच्चे के लिए पालना-घर (क्रेच) की व्यवस्था नहीं है। इसके बावजूद तबादला नहीं रोके जाने पर अनु ने शीर्ष अदालत की शरण ली थी। 

अपनी याचिका में अनु ने कहा था कि दो वर्षीय बच्ची की कामकाजी मां का तबादला ऐसी जगह नहीं किया जा सकता, जहां क्रेच व उसकी देखभाल की सुविधा उपलब्ध न हो। महिला सैन्य अधिकारी ने शीर्ष अदालत से सेना को राष्ट्रीय बाल नीति, 2013 के अनुपालन का निर्देश देने की भी गुहार लगाई थी। 
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इस याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) माधवी दीवान को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि अदालत की शरण लेने के चलते अनु डोगरा का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। पीठ ने कहा कि महिला अधिकारी ने अपने अधिकार का उपयोग किया है। 

इससे पहले सुनवाई के दौरान एएसजी ने पीठ को यह कहा कि जिस जगह पर अनु डोगरा का तबादला किया गया है, वहां से कुछ दूर पर क्रेच की सुविधा मौजूद है। महिला उस क्रेच में अपने बच्चे को रखकर अपना काम कर सकती हैं। हालांकि एएसजी ने पीठ को यह बताया कि अनु डोगरा के पति (वह भी सैन्य अधिकारी हैं) का तबादला भी उसी जगह करने से इनकार कर दिया गया है। इसके बाद अनु डोगरा की ओर से पेश वकील ऐश्वर्या भाटी ने एएसजी के सुझाव को स्वीकार कर लिया। 

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