इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में इलाहाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ रहे अमिताभ बच्चन को उनके विपक्षियों ने राजनीति में जीरो करार दिया था। तब अमिताभ का सौम्य उत्तर होता था, जीरो के पास सिर्फ आगे बढ़ने का अवसर होता है। प्रियंका भले राजनीति में जीरो नहीं लेकिन उन्हें अभी तक चुनावी राजनीति की कसौटी पर कसा नहीं गया है।
प्रिंयका की शक्ल-सूरत दादी इंदिरा गांधी से मिलती है। दक्षिण भारत और यूपी के ग्रामीण अंचल के कुछ भागों में अभी भी कांग्रेस को इंदिरा गांधी की पार्टी माना जाता है। अमेठी और रायबरेली के बाहर उन्हें कम लोग जानते हैं इसलिए उन पर राजनीतिक और निजी प्रहार कम होंगे।
प्रियंका के लिए सबसे बड़ा बोझ पति राबर्ट वाड्रा पर लगे जमीन घोटाले के आरोप हैं। उनके खिलाफ लगभग दो दर्जन मामलों में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जांच कर रहा है। इन मामलों को लेकर प्रियंका के खिलाफ सियासी हमला हो सकता है।
माना जा रहा है कि चुनाव के मद्देनजर जांच एजेंसियां वाड्रा के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कड़ी कार्रवाई नहीं करेगी क्योंकि इसे प्रियंका के राजनीति में पदार्पण से जोड़कर देखा जा सकता है और इससे कांग्रेस को सहानुभूति मिल सकती है।