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एनआरआई पतियों से शोषित महिलाएं कर रहीं नए कानून की मांग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shilpa Thakur Updated Sun, 06 Jan 2019 04:42 PM IST
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women crime - फोटो : pexels.com

अक्सर पतियों द्वारा पत्नी का शोषण करने के कई मामले सामने आते रहते हैं। अधिकतर मामलों में पत्नियां पति को सजा दिलवाने में कामियाब भी रहती हैं। लेकिन जब पति किसी और देश में रहने चला जाए और अचानक ही संपर्क करना खत्म कर दे तो भला पत्नी क्या करे। 

दहेज और शादी में लगाए पैसों के चलते परिवार भी कंगाल हो जाते हैं। वहीं पति दूसरे देशों में जाने के बाद दूसरी शादी कर लेते हैं और एकतरफा तलाक ले लेते हैं। लेकिन उनकी पत्नियां सजा भुगतती रहती हैं। ऐसी ही कहानी है कई महिलाओं की।



परमिंदर कौर (बदला हुआ नाम) का कहना है कि 2015 में उसकी शादी एक सपना सच होने जैसा था और उसके बाद के 40 दिन उसकी जिंदगी के बेहतरीन पल थे। लेकिन उसके पति के पढ़ाई पूरी करने के लिए कनाडा जाने के बाद चीजें पूरी तरह बदल गईं।

परमिंदर ने कहा कि उसके पति के जाते ही उसके ससुराल वालों ने उसे मानिसक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और उसके घर वालों से हर महीने एक लाख रुपए दहेज के रूप में मांगने शुरू कर दिए।

यह भी पढ़ें- तीन तलाक पीड़िताओं से अधिक है छोड़ी गई महिलाओं की संख्या, इनकी भी लो सुध

उन्होंने कहा, "उन्होंने मेरे घरवालों से कहा कि उन्हें (ससुराल वालों को) मुझे खिलाने (खाना) के लिए पैसे चाहिए और मेरे माता-पिता के इनकार करने पर उन्होंने मुझे प्रताड़ित किया।" 
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परमिंदर (19) ने कहा कि इन सब प्रताड़नाओं के बीच उसके ससुराल वाले अचानक कनाडा चले गए और उसके बाद उसकी उनसे (ससुराल वालों से) और अपने पति से कभी कोई बात नहीं हुई। बाद में उसके पति ने एक पक्षीय तलाक दे कर दूसरी शादी कर ली। 

परमिंदर और उसकी तरह धोखा खा चुकी अन्य महिलाएं अब एक ऐसे विशेष अंतरराष्ट्रीय कानून की मांग कर रही हैं जिससे फरार पतियों का प्रत्यर्पण मुमकिन हो सके।

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women crime - फोटो : pexels.com
अक्सर पतियों द्वारा पत्नी का शोषण करने के कई मामले सामने आते रहते हैं। अधिकतर मामलों में पत्नियां पति को सजा दिलवाने में कामियाब भी रहती हैं। लेकिन जब पति किसी और देश में रहने चला जाए और अचानक ही संपर्क करना खत्म कर दे तो भला पत्नी क्या करे। 

दहेज और शादी में लगाए पैसों के चलते परिवार भी कंगाल हो जाते हैं। वहीं पति दूसरे देशों में जाने के बाद दूसरी शादी कर लेते हैं और एकतरफा तलाक ले लेते हैं। लेकिन उनकी पत्नियां सजा भुगतती रहती हैं। ऐसी ही कहानी है कई महिलाओं की।

परमिंदर कौर (बदला हुआ नाम) का कहना है कि 2015 में उसकी शादी एक सपना सच होने जैसा था और उसके बाद के 40 दिन उसकी जिंदगी के बेहतरीन पल थे। लेकिन उसके पति के पढ़ाई पूरी करने के लिए कनाडा जाने के बाद चीजें पूरी तरह बदल गईं।

परमिंदर ने कहा कि उसके पति के जाते ही उसके ससुराल वालों ने उसे मानिसक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और उसके घर वालों से हर महीने एक लाख रुपए दहेज के रूप में मांगने शुरू कर दिए।

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उन्होंने कहा, "उन्होंने मेरे घरवालों से कहा कि उन्हें (ससुराल वालों को) मुझे खिलाने (खाना) के लिए पैसे चाहिए और मेरे माता-पिता के इनकार करने पर उन्होंने मुझे प्रताड़ित किया।" 

परमिंदर (19) ने कहा कि इन सब प्रताड़नाओं के बीच उसके ससुराल वाले अचानक कनाडा चले गए और उसके बाद उसकी उनसे (ससुराल वालों से) और अपने पति से कभी कोई बात नहीं हुई। बाद में उसके पति ने एक पक्षीय तलाक दे कर दूसरी शादी कर ली। 

परमिंदर और उसकी तरह धोखा खा चुकी अन्य महिलाएं अब एक ऐसे विशेष अंतरराष्ट्रीय कानून की मांग कर रही हैं जिससे फरार पतियों का प्रत्यर्पण मुमकिन हो सके।

women crime - फोटो : pexels.com
साधना (बदला हुआ नाम) 2010 में शादी कर अमेरिका जाने से पहले एक आईटी कंपनी में काम करती थी।

उसने कहा, "मैं जैसे ही कैलिफोर्निया पहुंची मेरे पति ने मेरे सारे दस्तावेज और पैसे ले लिए। उसने कई बार मेरे साथ बलात्कार किया और फिर सड़क पर फेंक दिया। मेरे पास कोई विकल्प नहीं था और वापस आने को मजबूर थी।" 

अब साधना (30) अपनी आठ वर्षीय बेटी के साथ दिल्ली में रहती हैं। उन्होंने अपने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन वह तब से लौटकर नहीं आया।

उन्होंने कहा, "मैंने हाल ही में सोशल मीडिया पर देखा कि उसने फिर से शादी कर ली है। यह सही कैसे है और क्यों उसे न्याय के घेरे में नहीं लाया गया।"

इसी तरह के हालातों का सामना कर चुकी स्मृति (बदला हुआ नाम) को उसके पति ने मेलबर्न में अकेला छोड़ दिया था, जिसके बाद उसे अभिघातज के बाद का तनाव विकार (पीटीएसडी) हो गया।

परमिंदर, साधना और स्मृति का मानना है कि एक अंतरराष्ट्रीय कानून उनकी जैसी महिलाओं को कुछ हद तक इंसाफ दिला पाएगा।

उन्होंने भादंवि की धारा 498ए (पति या पति के किसी रिश्तेदार द्वारा किसी भी प्रकार की क्रूरता) में बलात्कार, मारपीट, धोखाधड़ी और छल जैसे कई बड़े अपराधों को शामिल किए जाने की मांग भी की, जिससे फरार पतियों का प्रत्यर्पण संभव हो सके।

इस पूरे प्रकरण में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एनआरआई शादियों से जुड़ी बढ़ती समस्याओं से निपटने के पूर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने हाल ही में अपनी पत्नियों को छोड़ने वाले 33 प्रवासी भारतीय या एनआरआई के पासपोर्ट रद्द किए थे।
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