महिलाएं ऐतिहासिक रूप से पुरुषों के दबदबे वाले व्यावसायिक संस्थानों में घुसपैठ नहीं कर रही हैं, बल्कि उन अनुचित बाधाओं को ध्वस्त कर रही हैं, जिन्होंने पीढ़ियों से उन्हें बाहर रखा हुआ था। सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी.नागरत्ना ने शुक्रवार को यह टिप्पणी की।
जस्टिस नागरत्ना वरिष्ठ वकील महालक्ष्मी पावनी की किताब 'वुमन लॉज फ्रॉम द वॉम्ब टू द टॉम्ब: राइट्स एंड रेमेडीज' के विमोचना के मौके पर बोल रही थीं। शीर्ष कोर्ट की जज ने कहा, आज जो हो रहा है, वह महिलाओं का पुरुषों के स्थान पर आक्रमण नहीं है। महिलाएं उन बाधाओं को खत्म कर रही हैं, जिन्होंने पीढ़ियों से उन्हें अनुचित तरीके से बाहर रखा है।
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'अपना हक वापस ले रहीं महिलाएं'
सुप्रीम कोर्ट की जज ने कहा, आज जो कुछ हो रहा है, वो ये नहीं है कि महिलाएं पुरुषों की जगहों में घुसपैठ कर रही हैं, बल्कि वो उन बाधाओं को तोड़ रही हैं, जिन्होंने उन्हें पीढ़ियों तक नाजायज तरीके से बाहर रखा। आज जो भी महिला कोर्ट, विधानसभा या बोर्ड रूम में कदम रख रही है, वो अपनी सीमाएं नहीं बढ़ा रही,बल्कि इस देश की बौद्धिक और संस्थागत विरासत में अपना हक वापस ले रही है।
'समानता को बढ़ावा दे हमारी भाषा'
जस्टिस नागरत्ना ने जोर देकर कहा कि महिलाओं की भूमिका में आ रहे बड़े बदलाव, खासकर उन पेशों में जो ऐतिहासिक रूप से पुरुषों के कब्जे में रहे हैं, उन पर चर्चा करते वक्त हमारी भाषा ऐसी होनी चाहिए जो समानता को बढ़ावा दे और महिलाओं की उनकी जायज भागीदारी का सम्मान और उत्सव मनाए।
'शब्दों में बयां होते हैं बदलाव'
उन्होंने आगे कहा, यह जरूरी है कि हम थोड़ा देर रुकें और सोचें कि हम इन बदलावों को कैसे शब्दों में बयान करते हैं। अक्सर हम सुनते हैं कि 'महिलाएं अब न्यायपालिका में आ रही हैं', 'बोर्डरूम में अपनी जगह बना रही हैं' या 'सत्ता और प्रभाव वाले क्षेत्रों में कदम रख रही हैं'। लेकिन जब इन बातों को गहराई से समझते हैं, तो इनमें यह छिपा संदेश होता है कि ये जगहें महिलाओं के लिए नहीं थीं और उनकी मौजूदगी कुछ अलग या जबरदस्ती जैसी लगती है।
उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा पुराने समय की उस सोच को दोहराती है, जिसमें शक्ति, निर्णय लेने की क्षमता और बुद्धिमत्ता को केवल पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था। ये बातें जोर से नहीं, लेकिन धीरे-धीरे ये कहती हैं कि महिलाएं बाहरी हैं, जबकि सच यह है कि वे पूरी तरह से इस व्यवस्था की हकदार हिस्सा हैं। ऐसी सोच न सिर्फ पुरानी है, बल्कि बिलकुल गलत है।
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