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रंजीत कौर से बनी फातिमा, निकाह.. तलाक.. फिर हलाला

Thu, 15 Mar 2018 12:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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पति को छोड़कर रंजीत कौर फातिमा बन गई। निकाह भी कर लिया लेकिन तलाक मिल गया। दोबारा शादी के लिए उसका हलाला भी हो गया.. इद्दत भी पूरी कर ली लेकिन अब पति दोबारा निकाह करने के लिए राजी नहीं है। फातिमा अब दर-दर भटक रही है। पिछले दिनों उसके घर पर हमला भी हुआ और मामले में पैरवी न करने की धमकी दी गई। तब एसएसपी को तहरीर दी। अब मेरा हक फाउंडेशन से मदद मांगने पहुंची।
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इसका खुलासा मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी ने गढै़या स्थित अपने कार्यालय पर प्रेस के सामने किया। फातिमा की कहानी, उसी की जुबानी कहें तो वह दिल्ली की रहने वाली है। उसका मूल नाम रंजीत कौर है। 30 साल पहले उसकी शादी पूरनपुर में हुई थी।

 अब से लगभग 18 साल पहले उसने इस्लाम धर्म कुबूल कर लिया। इसी के साथ उसका नाम फातिमा नूरी हो गया। फिर वह दरगाह आला हजरत के जमाल मियां से मुरीद भी हो गई। उसके दो बेटे भी हैं जिसे पति ने देने से इंकार कर दिया तो फातिमा ने कोर्ट से दोनों बच्चों को हासिल कर लिया।
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पहले पति से अलग होने के बाद उसके मुंह बोले पिता और भाई ने सहारा दिया। उन्होंने ही 12-13 साल पहले सूफी टोला निवासी हफीज खां से फातिमा का निकाह करा दिया। हफीज की पहली पत्नी का इंतकाल हो चुका था, उसके एक बेटी है।

 
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ढाई साल बाद हफीज ने फातिमा को तलाक दे दिया

निकाह के लगभग ढाई साल बाद हफीज ने फातिमा को तीन तलाक दे दिया। माफी-दराफी के बाद हफीज फिर से फातिमा को अपनाने के लिए तैयार हो गया। इसके लिए उसने पड़ोसी से हलाला करवाया। फातिमा ने इद्दत भी पूरी कर ली लेकिन फिर हफीज निकाह के लिए टालने लगा। बेसहारा हो कर उसने कारचोब का काम सीखा और उसी को अपनी रोजी रोटी का सहारा बना लिया।

फिलहाल फातिमा इज्जतनगर रोड नंबर एक पर किराए के घर में रह रही है। उसका पहले पति से पैदा बड़ा बेटा दानिश अली अरब में नौकरी करता है, जबकि छोटा मोनिस अली साथ रहता है। पिछले दिनों फातिमा के घर पर हमला भी किया गया। इसकी शिकायत उसने सात फरवरी को एसएसपी से की थी। फातिमा ने जब हफीज से अपने साथ हुए धोखे की शिकायत मुख्यमंत्री से करने की बात कही तो उसे धमकाया गया।

इधर, फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी ने कहा कि इस्लाम एक खूबसूरत मजहब है। जो रंजीत को भा गया और वह फातिमा बन गई। मगर कुछ लोग इस्लाम की तस्वीर को अपने किरदार से गलत ढंग से पेश कर इसकी शक्ल बिगाड़ रहे हैं। इस्लाम कभी जुल्म ज्यादती की इजाजत नहीं देता। एक महिला जिसने इस्लाम मजहब की खूबियों के देखते हुए इस्लाम कुबूल किया आज इस्लाम को मानने वालों ने उसके साथ ज्यादती की है। इससे फातिमा का दिल दुखा है। उन्होंने कहा कि फातिमा उनके पास मदद के लिए आई है। वह उसे न्याय दिलाने में पूरा सहयोग करेंगी।
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