पति को छोड़कर रंजीत कौर फातिमा बन गई। निकाह भी कर लिया लेकिन तलाक मिल गया। दोबारा शादी के लिए उसका हलाला भी हो गया.. इद्दत भी पूरी कर ली लेकिन अब पति दोबारा निकाह करने के लिए राजी नहीं है। फातिमा अब दर-दर भटक रही है। पिछले दिनों उसके घर पर हमला भी हुआ और मामले में पैरवी न करने की धमकी दी गई। तब एसएसपी को तहरीर दी। अब मेरा हक फाउंडेशन से मदद मांगने पहुंची।
इसका खुलासा मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी ने गढै़या स्थित अपने कार्यालय पर प्रेस के सामने किया। फातिमा की कहानी, उसी की जुबानी कहें तो वह दिल्ली की रहने वाली है। उसका मूल नाम रंजीत कौर है। 30 साल पहले उसकी शादी पूरनपुर में हुई थी।
अब से लगभग 18 साल पहले उसने इस्लाम धर्म कुबूल कर लिया। इसी के साथ उसका नाम फातिमा नूरी हो गया। फिर वह दरगाह आला हजरत के जमाल मियां से मुरीद भी हो गई। उसके दो बेटे भी हैं जिसे पति ने देने से इंकार कर दिया तो फातिमा ने कोर्ट से दोनों बच्चों को हासिल कर लिया।
पहले पति से अलग होने के बाद उसके मुंह बोले पिता और भाई ने सहारा दिया। उन्होंने ही 12-13 साल पहले सूफी टोला निवासी हफीज खां से फातिमा का निकाह करा दिया। हफीज की पहली पत्नी का इंतकाल हो चुका था, उसके एक बेटी है।