उन्होंने इस मौके पर दक्षिण सूडान का उदाहरण दिया जहाँ संयुक्त राष्ट्र की महिला पुलिस देश के भीतर ही विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए शिविरों के भीतर और बाहर महिलाओं और युवाओं को रहन-सहन के बेहतर तरीके सीखने में मदद कर रही हैं।
काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में भी यूएन की महिला पुलिस अधिकारी आंतरिक सुरक्षा बलों में क्षमता विकसित करने और जवाबदेही निर्धारित करने में मदद कर रही हैं। माली में पुनर्संगठित आंतरिक रक्षा और सुरक्षा बलों व आम नागरिकों के बीच भरोसा कायम करने वाले उपायों को बढ़ावा देने में मदद कर रही हैं।
हमारी महिला पुलिस अधिकारी ईबोला वायर से प्रभावित इलाकों में भी सक्रिय हैं और राहत व मानवीय सहायता अभियानों के लिए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
साथ ही महिला पुलिस अधिकारी संयुक्त राष्ट्र के तमाम मिशनों में यौन शोषण व दुर्व्यहार क्षेत्र में ट्रेनिंग देने और इस मुद्दे पर संवेदनशीलता बढ़ाने जैसे अहम मुद्दों में भी अहम योगदान कर रही हैं।
ज्याँ पियर लैक्रोइक्स का कहना था, मेजर सेयनबोऊ डिऔफ द्वारा चलाए जा रहे महिला पुलिस अधिकारी नैटवर्क और इसी तरह के अन्य नैटवर्कों के जरिए ये महिला पुलिस अधिकारी यौन शोषण व दुर्व्यवहार (एसईए) के मामलों को होने से रोकने, होने जाने पर पीड़ितों की सहायता करने और मामलों की जाँच-पड़ताल करने में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं जिससे यौन हिंसा के मामलों को कतई बर्दाश्त नहीं करने की संयुक्त राष्ट्र की नीति मजबूत होती है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र व काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य के लोगों की असाधारण सेवा करने के लिए मेजर सेयनबोऊ डिऔफ को बधाई देते हुए कहा कि विश्व संगठन के आदर्श मूल्यों को वास्तविक रूप देने के उनके प्रयासों के जरिए एक मिसाल कायम करने पर मिशनों और मुख्यालय में ड्यूटी पर तैनात तमाम यूएन पुलिस अधिकारी प्रेरित महसूस कर रहे हैं।
ज्याँ पियर लैक्रोइक्स ने इस असाधारण कार्य में मेजर सेयनबोऊ डिऔफ की मदद व समर्थन करने के लिए उनके परिवार का भी शुक्रिया अदा किया। उन्होंने ये भी ध्यान दिलाया कि मेजर सेयनबोऊ डिऔफ को अपनी आधिकारिक तैनातियों के दौरान बहुत से बलिदान भी करने पड़े होंगे।
शांतिरक्षा अभियानों में जितनी ज्यादा संख्या में महिलाएँ तैनात होंगी, हम सभी उतने ही ज़्यादा असरदार साबित होंगे।
यूएन पुलिस आयुक्त लुइस कैर्रिल्हो ने भी मेजर सेयनबोऊ डिऔफ के अनुभवों के बारे में बात करते हुए बताया कि अपने देश सेनेगल में भी गार्डियन डी ला पायक्स पुरस्कार हासिल करने वाली पहली महिला बनीं, जबकि उनसे पहले तक ये पुरस्कार सिर्फ पुरुषों को ही मिला था।
अपने करियर के शुरूआती समय से ही उन्होंने बेहतरी लाने और अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए अथक काम करने का अपना पक्का इरादा दिखाया है। गोमा में यौन हिंसा व दुर्व्यवहार टास्क फ़ोर्स की टीम लीडर और यूएनपोल महिला नैटवर्क की अध्यक्ष के रूप में उन्होंने महिलाओं की आवाज़ को वजन दिए जने और यौन शोषण व दुर्व्यवहार की रोकथाम करने में भी अपना संकल्प दिखाया है।
मेजर सेयनबोऊ डिऔफ़ के प्रयासों की बदौलत मिशन को 2018 में यौन शोषण व दुर्व्यवहार एक भी मामला नहीं होने का दर्जा हासिल हुआ। जबकि 2016 और 2017 में यौन शोषण व दुर्व्यवहार के 140 मामले दर्ज हुए थे।
यूएन पुलिस सलाहकार ने मेजर सेयनबोऊ डिऔफ को यौन शोषण व दुर्व्यवहार को जड़ से खत्म करने और यूएन कर्मचारियों के हर जगह उच्च मानकों और बर्ताव के साथ काम करने के प्रयासों में एक असाधारण व सकारात्मक बल करार दिया है।