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मुस्लिम युवक से प्रेम संबंध के चलते दो सालों तक नजरबंद रखी गई लड़की बचाई गई

Mon, 07 May 2018 12:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
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मंगलौर पुलिस ने केरल की रहने वाली एक 24 वर्षीय हिंदू महिला को आजाद कराया है जिसे कथित तौर पर उसकी मां ने दो साल से एक किराये के घर में कैद कर रखा था क्योंकि वह एक मुस्लिम युवक से प्यार करती थी। इस काम में बीजेपी के लोगों ने लड़की की मां की मदद की। 
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कर्नाटक में मंगलौर पुलिस को केरल पुलिस से खबर मिली जिसके बाद अंजलि प्रकाश को एक मई को छुड़ाया गया। पुलिस को खबर मिली कि अंजलि को उसकी मां विनीथा ने एक किराये के घर में नजरबंद कर रखा है। महिला थ्रिसुर के गुरुवरूर की रहनेवाली है। 

मंगलौर डीसीपी उमा प्रसान्थ ने बताया कि अंजली को उसकी मां की निगरानी से छुड़ाया गया। इसके बाद उसे (अंजलि) को कोर्ट में पेश किया गया जहां उसने अपनी मां के साथ जाने से इंकार करने पर उसे महिला आश्रम भेज दिया गया। प्रसान्थ ने बताया कि मामले में मां को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही इस केस से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी की जा रही है। 
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जारी किए गए वीडियो में अंजलि ने दावा किया था कि बीजेपी के समर्थन से उसे मंगलौर में हिरासत में रखा गया था। डीसीपी ने कहा, "ऐसी चीजों की अभी पुष्टि नहीं की जा सकी है। हम उसके लगाए गए आरोपों की जांच कर रहे हैं।" 

ऐसे सामने आया मामला

यह मामला तब सामने आया जब अंजली ने शनिवार को एक वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई थी। उसने वीडियो में कहा था कि यह उसका आखिरी वीडियो हो सकता है। उसके पास बचने का कोई रास्ता नहीं है। अगर कल को उसके साथ कुछ होता है तो इसके लिए उसकी मां ही जिम्मेदार होगी। उसने कहा कि वह बीते दो सालों से बहुत कुछ सहन कर रही है। उसके साथ ऐसा केवल इसलिए हो रहा है क्योंकि वह एक मुस्लिम लड़के से प्यार करती है। 

उसने कहा कि उसकी मां ने उसे दो महीने तक मानसिक उपचार के लिए अमृता अस्पताल में भर्ती किया था। इसके बाद अगले दो महीने के लिए उसे आरएसएस के अनाथालय में रखा गया। उसने कहा कि बीते कुछ महीनों से वह मंगलौर में रह रही है। उसने बताया कि इन लोगों को बीजेपी का पूरा समर्थन है। इस जगह से उसे कहीं जाने की अनुमति नहीं है। उसने कहा कि वह इस स्थिति से काफी निराश है क्योंकि किसी ने उसे बचाने के लिए हस्तक्षेप नहीं किया।

अंजली ने पुलिस को बताया कि वह अपने बचपन के दोस्त नलाकथ मानस से प्यार करती है। उसकी उम्र 28 साल है और वह पॉल्ट्री फर्म चलाता है। सारी परेशानी अगस्त 2016 में खड़ी हुई जब उसकी मां को उनके प्रेम संबंध के बारे में पता चला। जिसके बाद उसके रिश्तेदारों ने उस पर खूब अत्याचार किया। इसके बाद उसे मानसिक इलाज के लिए कोची स्थित मेंटल हॉस्पिटल भेज दिया गया। 
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अदालत से लगानी पड़ी गुहार

मानस ने बताया कि जब अंजलि को मानसिक अस्पताल में 40 दिनों तक रखा गया तो उसने हाईकोर्ट में हैबियस कॉरपस याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि अंजलि के परिवार वालों ने मेरी छवि आतंकवादी के तौर पर पेश की। उन्होंने मानसिक बीमारी के इलाज के संबंध में प्रमाणपत्र तैयार किया। अदालत ने महिला और उसकी मां को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया। अदालत ने मुझे उससे मिलने से रोक दिया।" 

मानस ने साल 2017 की शुरुआत में बताया था कि थ्रिसुर में एक बीजेपी नेता की मदद से अंजली को उसकी मां मंगलौर लेकर गई थी। विनीथा ने हाल ही में अंजली को मोबाइल फोन दिया जिसमें सिम कार्ड नहीं था। मैंने ही अंजली के लिए सिम कार्ड की व्यवस्था की जिसके बाद उसने कॉल कर पुलिस से मदद मांगी। 
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