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BJP: सांसद बापट के जाने के साथ भाजपा ने पुणे में खोया तीसरा नेता, दो सिटिंग विधायकों का भी हो चुका है निधन

Thu, 30 Mar 2023 03:42 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे

सार

उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक वीडियो संदेश में कहा कि बापट के निधन की खबर सभी के लिए स्तब्ध करने वाली है। उन्होंने कहा, पिछले कई दिनों से वह अपनी बीमारी से लड़ रहे थे और हमें विश्वास था कि बापट जो एक योद्धा हैं, बीमारी को हरा देंगे।
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गिरिश बापट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी से लोकसभा सांसद गिरीश बापट का बुधवार को 72 साल की उम्र में निधन हो गया। बापट पिछले कुछ महीनों से सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। पांच बार विधायक रहे बापट 2019 में पुणे लोकसभा से सांसद बने थे। 
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राष्ट्रीय संगठन को एक बड़ा झटका
बापट का निधन राष्ट्रीय संगठन के लिए एक बड़ा झटका है। पिछले चार माह में भाजपा ने पश्चिमी महाराष्ट्र में अपने तीन दिग्गज नेताओं को खो दिया है। बापट से पहले, भाजपा के दो मौजूदा विधायक मुक्ता तिलक (कस्बा पेठ निर्वाचन क्षेत्र) और लक्ष्मण जगताप (चिंचवाड़) की 22 दिसंबर, 2022 और 3 जनवरी, 2023 को मौत हो गई थी। इसके बाद हुए विधानसभा उपचुनावों में भाजपा चिंचवाड़ को बरकरार रखने में कामयाब रही, जहां दिवंगत विधायक जगताप की पत्नी अश्विनी ने राकांपा को हराया, लेकिन कस्बा पेठ निर्वाचन क्षेत्र में उसे हार का सामना करना पड़ा। यहां से  भाजपा उम्मीदवार हेमंत रसाने कांग्रेस-एमवीए के उम्मीदवार रवींद्र धंगेकर से हार गए।

कांग्रेस के गढ़ में बापट की वजह से भाजपा ने की सेंधमारी
पुणे शहर में भाजपा को मजबूत करने का श्रेय बापट को जाता है। यह कभी कांग्रेस का गढ़ था। बापट के राजनीतिक विभाजन के नेताओं के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध थे और राज्य की सांस्कृतिक राजधानी के आम लोगों के साथ घनिष्ठ संबंध थे। वह 2019 में लोकसभा सांसद चुने जाने से पहले पांच बार कस्बा पेठ विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। 
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उप मुख्यमंत्री ने जारी किया वीडियो संदेश
उप मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने एक वीडियो संदेश में कहा कि बापट के निधन की खबर सभी के लिए स्तब्ध करने वाली है। उन्होंने कहा, पिछले कई दिनों से वह अपनी बीमारी से लड़ रहे थे और हमें विश्वास था कि बापट जो एक योद्धा हैं, बीमारी को हरा देंगे। लेकिन आज वह उम्मीद खत्म हो गई है। फडणवीस ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, उनका लोगों के साथ बहुत अच्छा जुड़ाव था और उनकी सोच अच्छी थी। वह एक उत्कृष्ट सांसद थे। चाहे वह एक नगरसेवक हो, नागरिक निकाय (पुणे नगर निगम) के विधायक या सांसद की स्थायी समिति के प्रमुख, उन्होंने अपने काम से एक अमिट छाप छोड़ी है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बापट ने पुणे के विकास में बहुमूल्य योगदान दिया है। उनका निधन भाजपा और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। बापट के काम को भुलाया नहीं जा सकता है।

विकास की करते थे राजनीति
विधानसभा में विपक्ष के नेता राकांपा के अजीत पवार ने कहा कि दिवंगत भाजपा नेता की राजनीति विकास के इर्दगिर्द केंद्रित थी। बापट एक समावेशी नेता थे जिन्होंने जाति, पंथ, धर्म, भाषा से परे जाकर सामाजिक कार्य और विकास की राजनीति की। 

आरएसएस के साथ किया काम 
3 सितंबर, 1950 को पुणे जिले के तलेगांव दाभाडे में जन्मे बापट ने अपने शुरुआती वर्षों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ काम किया। आपातकाल (1975-77) के दौरान वे 19 महीने नासिक जेल में बंद रहे। बापट 1983 में पार्षद बने और 12 साल बाद पुणे शहर के कस्बा पेठ से विधानसभा के लिए चुने गए। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (2014-19) के मंत्रिमंडल में खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण, खाद्य और औषधि प्रशासन और संसदीय मामलों के मंत्री के रूप में कार्य किया।

सम्मान के साथ किया गया अंतिम संस्कार
पूरे राजकीय सम्मान के साथ बापट का अंतिम संस्कार वैकुंठ श्मशान भूमि में किया गया। दिवंगत राजनेता की अंतिम यात्रा में राजनीतिक दलों के सदस्यों और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने हिस्सा लिया। फडणवीस और राज्य के मंत्री चंद्रकांत पाटिल वैकुंठ श्मशान घाट जाने वाले नेताओं में शामिल थे।
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