पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होते ही शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र के हंगामेदार होने के आसार हैं। राफेल सौदा, सीबीआई बनाम सीबीआई, आरबीआई और सरकार में टकराव, किसान और महंगाई जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरना चाहता है। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मानसून सत्र से पहले सभी सांसदों को पत्र लिखकर संसद चलाने में सहयोग मांगा था।
सदस्यों के सहयोग के कारण ही तब लोकसभा का कामकाज 118 फीसदी हुआ और 21 विधेयक पारित हो पाए। उस सफलता से उत्साहित महाजन ने फिर सांसदों को पत्र भिजवाया है। लोकसभा की महासचिव स्नेहलता श्रीवास्तव ने 26 अक्तूबर को लिखे पत्र में सांसदों से न केवल संसद को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग मांगा, बल्कि साथ में लोकसभा अध्यक्ष का 7 जुलाई का पत्र भी संलग्न किया है। यह पहली बार है जब लोकसभा महासचिव ने पत्र लिखकर सांसदों से सुझाव मांगे हैं।
शीत सत्र सरकार के लिए इसलिए अहम
मोदी सरकार के लिए शीतकालीन सत्र का शांतिपूर्ण ढंग से चलना इसलिए भी जरूरी, क्योंकि उसके बाद यह सरकार सिर्फ संक्षिप्त बजट सत्र ही बुला पाएगी, जिसमें मई 2019 तक का बजट पारित करना होगा। सरकार इस दौरान लंबित कुछ जरूरी विधेयक भी पारित कराना चाहेगी, जबकि विपक्ष सरकार को घेरना चाहेगा।
विपक्ष का मानना है कि संसद को सुचारु रूप से चलाने की जिम्मेदारी विपक्ष से ज्यादा सरकार की होती है। बेहतर होता यदि विपक्ष से बातचीत का जिम्मा लोकसभा अध्यक्ष के बजाय संसदीय कार्य मंत्री उठाते।