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चुनावी चंदे पर किचकिच, कांग्रेस बोली- सत्ताधारी दल को पैसा देने वाला सरकार में दखल भी देगा

Thu, 21 Nov 2019 02:45 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी - फोटो : ANI
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चुनावी बॉन्ड को लेकर गुरुवार को लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस ने चुनावी बॉन्ड का मुद्दा उठाया और भाजपा पर इस योजना के माध्यम से सरकारी भ्रष्टाचार को अमलीजामा पहनाने का गंभीर आरोप लगाया।

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शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए कांग्रेस के मनीष तिवारी ने दावा किया कि भारतीय रिजर्व बैंक और चुनाव आयोग के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने चुनावी बॉन्ड जारी किए और उसके माध्यम से सरकारी भ्रष्टाचार को अमलीजामा पहनाया गया।

मनीष तिवारी को बोलने की नहीं मिली अनुमति
उन्होंने कहा कि 2017 के बजट में घोषणा के बाद जब यह योजना लागू की गई थी तो इसे केवल लोकसभा चुनाव तक सीमित रखा गया था। हालांकि अप्रैल 2018 में कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर ....(इसे बदल दिया गया)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने तिवारी को टोकते हुए कहा कि किसी का नाम नहीं लिया जाए। उन्हें इसके बाद बोलने की अनुमति नहीं दी गई।
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इस पर तिवारी कहते सुने गए कि उनके पास आरटीआई से प्राप्त कागज हैं और वह सदन के पटल पर रखने को तैयार हैं। तिवारी और कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने उन्हें बात पूरी करने की अनुमति देने की मांग की, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया।इस पर विरोध जताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत विपक्षी दल के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर कहा, 'जब इलेक्टोरल बॉन्ड पेश किए गए थे, तो हममें से कई लोगों ने इसपर गंभीर आपत्ति जताई थी कि कैसे यह आसानी से अमीर निगमों और व्यक्तियों के लिए अनुचित राजनीतिक दलों, विशेष रूप से सत्तारूढ़ पार्टी को प्रभावित करने का एक तरीका बन सकता है।'

राज्यसभा में भी उठा मामला
वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश तथा चुनावी बॉन्ड के मुद्दे पर आरबीआई की आपत्ति पर चर्चा करने की मांग कर रहे लेफ्ट और कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही बाधित हुई। हंगामे की वजह से राज्यसभा में शून्यकाल नहीं हो पाया। सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने आवश्यक दस्तावेज पटल पर रखवाए।

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