सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा है कि योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा लाया जा रहा लव जिहाद कानून संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ है। हमारा संविधान किसी भी धर्म के दो वयस्क युवा-युवतियों को आपसी रजामंदी से विवाह करने की अनुमति देता है। इस राह में धर्म या जाति के आधार पर कोई बंदिश नहीं लगाई जा सकती। उन्होंने कहा कि यह कानून संविधान के द्वारा किसी व्यक्ति को मिले मूल अधिकारों का सीधा उल्लंघन है, इसलिए उनकी राय में सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किए जाने पर यह नहीं ठहरेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून मुस्लिम युवकों को धार्मिक आधार पर प्रताड़ित करने की नीयत से लाया जा रहा है।
वरिष्ठ वकील आभा सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय बेंच ने अपने बेहद महत्वपूर्ण निर्णय में 'निजता के अधिकार' को मूल अधिकारों के अंतर्गत माना है। विवाह का मामला भी निजता के अंतर्गत आता है और इसलिए लव जिहाद कानून निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि वह किसी युवक-युवती को हिंदू-मुस्लिम की दृष्टि से नहीं देखती, बल्कि वह उन्हें दो वयस्कों की दृष्टि से देखती है जो अपनी जिंदगी के बारे में उचित फैसला ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि, इसलिए उनकी राय में यह कानून सुप्रीम कोर्ट में नहीं ठहरेगा।
उन्होंने कहा कि लव जिहाद जैसे कानून एक अर्थ में महिलाओं की 'समझ' पर भी सवाल खड़ा करते हैं। क्या इस कानून के जरिए हम यह कहना चाहते हें कि कोई स्त्री यह समझने में अयोग्य है कि कोई उसे धोखा दे रहा है या नहीं। या क्या हम यह कहना चाहते हैं कि महिला अपने लिए किसी योग्य साथी की तलाश करने में असमर्थ होती है। अगर प्रेम या विवाह के मामले में अगर कोई व्यक्ति धोखा दे रहा है तो उसे दंड देने के लिए पहले से ही कानून में प्रावधान मौजूद हैं और इसलिए इस तरह के कानून का कोई औचित्य नहीं है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य वकील अश्विनी उपाध्याय कहते हैं कि प्रेम या विवाह करना किसी के भी अधिकार का हिस्सा हो सकता है, लेकिन धोखा देना किसी का अधिकार नहीं हो सकता। इसलिए धोखा देने के कारण ऐसे व्यक्ति को उचित दंड दिया जाना चाहिए और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कानून का होना अनिवार्य है।
वहीं, विश्व हिंदू परिषद के नेता डॉक्टर सुरेंद्र जैन लव जिहाद कानून को सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक मानते हैं। उनका कहना है कि धर्म की पहचान छिपाकर विवाह करने से देश के अनेक हिस्सों में सांप्रदायिक वातावरण खराब हो रहा है। इसलिए देश में शांति बनाए रखने के लिए भी इस तरह के कानून की आवश्यकता है।
यूपी सरकार ने किया बचाव
हालांकि, योगी आदित्यनाथ सरकार के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा है कि यह कानून आपसी सहमति से विवाह कर रहे किसी युवक-युवती को रोकने के लिए नहीं है, बल्कि यह कानून केवल उन लोगों को रोकने के लिए है जो हिंदू युवतियों को अपने धर्म के विषय में गलत जानकारी देकर उन्हेंं प्रेम जाल में फंसाते हैं और बाद में उनका धर्मांतरण कराते हैं।
उन्होंने कहा कि यूपी सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने कानपुर के लव जिहाद के जिन 14 मामलों की जांच की थी, उनमें 11 शिकायतें सही पाई गई हैं। इनमें मुस्लिम युवकों ने अपनी पहचान छिपाकर स्वयं को हिंदू बताकर लड़कियों से शारीरिक संबंध बनाया और उनका धर्मांतरण करने के लिए दबाव डाला। लेकिन तीन मामले ऐसे भी सामने आए हैं जिनमें हिंदू लड़कियों ने कहा है कि उनसे शादी के लिए कोई झूठ नहीं बोला गया और वे अपनी मर्जी से विवाह करके सुखपूर्वक रह रही हैं। इन मामलों में युवकों को छोड़ दिया गया है।