प्रदेश की राजनीति के दूसरे जानकार चंद्रप्रकाश कहते हैं, प्रदेश में आज भी जाट और गैर जाट राजनीति हावी है। 2016 में आरक्षण के नाम पर प्रदेश में जो दंगे हुए थे, उनका राजनीतिक फायदा लेने वाले दलों की बात करें तो उसमें भाजपा अव्वल है। इनेलो और कांग्रेस, इस बाबत जब तक कुछ सोचते, तब तक इन दलों में आपसी तनाव चरम पर जा चुका था। लोकसभा चुनाव से पहले जाट-गैर जाट वोटरों को लेकर जो कयास लगाए गए, चुनाव परिणाम के बाद वे पूरी तरह फिट बैठे नजर आए। भाजपा ने न केवल गैर जाट वोट, बल्कि जाटों के वोट भी ले लिए।
अब प्रदेश में बड़े पैमाने पर जाट समुदाय के नेता भाजपा ज्वाइन कर रहे हैं। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर अब जाट नेता का ठप्पा लग चुका है। कुमारी शैलजा का कभी भी प्रदेश की राजनीति में कोई प्रभाव नहीं रहा। उन्हें गैर जाटों में भी एक जमीनी नेता के तौर पर नहीं देखा गया। हुड्डा जो कि कांग्रेस में बागी हो चले थे, अब उन्हें हरियाणा विधानसभा चुनाव में चुनाव अभियान कमेटी का चेयरमैन और विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल का प्रधान बनाया गया है। देखने वाली बात यह है कि जब विधानसभा भंग होने में ही मात्र एक सप्ताह बचा है तो ऐसे में भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस पद का फायदा कैसे उठा सकते हैं।
जाट वोटर जो भूपेंद्र सिंह हुड्डा से दूर जा रहा था, वे उसे बहुत ही सीमित तौर पर रोक सकते हैं। वह भी रोहतक, सोनीपत और झज्जर आदि जिलों में ही। कांग्रेस अगर यह समझती है कि वह भाजपा को वॉकओवर की स्थिति से दूर ले जाएगी तो यह केवल एक वहम होगा। विधानसभा चुनाव में भाजपा को इस बार दोहरा फायदा हो सकता है। गैर जाट वोटर तो पहले ही भाजपा के पाले में है, जबकि अब जाट समुदाय भी बड़े पैमाने पर भाजपा की ओर शिफ्ट हो रहा है।
भाजपा को हर जाति धर्म का मिल रहा समर्थन
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 18 अगस्त को चुनावी शंखनाद कर प्रदेश के सभी क्षेत्रों में रथ यात्रा शुरू की थी। जन आशीर्वाद यात्रा पर निकले मुख्यमंत्री पिछले एक पखवाड़े के दौरान कर्मचारियों और युवाओं के साथ साथ विभिन्न वर्गों के लिए दर्जन भर से अधिक बड़ी घोषणाएं कर चुके हैं। यात्रा के जरिए उन्होंने लोगों से सीधे संवाद किया है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने करोड़ों रुपये की योजनाओं का शिलान्यास भी किया है।
हरियाणा भाजपा के प्रधान सुभाष बराला कहते हैं, प्रदेश के लोगों का इस रथयात्रा को जो अपार स्नेह और समर्थन मिल रहा है, उससे देखकर लगता है कि आगामी विस चुनावों में भाजपा 75 पार के अपने नारे से कहीं आगे न निकल जाए। प्रदेश में सभी विपक्षी दल हाशिये पर हैं। सभी वर्गों ने भाजपा सरकार की नीतियों पर भरोसा जताया है। यही वजह है कि हम इस चुनाव को खुद के लिए वॉकओवर मानकर चल रहे हैं।