शनिवार को हुई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों से बातचीत को लेकर सकारात्मक संदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि वे किसानों से बातचीत से केवल एक कदम दूर हैं और किसानों से समझौते के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा की गई पेशकश आज भी बरकरार है। तो क्या प्रधानमंत्री किसानों से बातचीत की पहल करेंगे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात को किसान नेता सकारात्मक संकेत मान रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि पिछले वायदों पर ही नई वार्ता होने से सफलता की उम्मीद नहीं की जा सकती। लेकिन अगर सरकार कुछ कदम आगे बढ़ने का संकेत देती है तो समस्या का समाधान निकल सकता है।
आढ़ती किसान संघर्ष कमेटी, पंजाब के नेता रविंदर सिंह चीमा ने अमर उजाला से कहा कि आज सद्भावना दिवस मनाकर वे यही संदेश देना चाहते हैं कि अहिंसा और बातचीत ही किसी समस्या को हल करने का सबसे बेहतर माध्यम हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी बातचीत का संकेत दे रहे हैं तो यह स्वागत योग्य कदम है। किसान नेता भी सरकार से बातचीत के लिए सहर्ष तैयार हैं।
लेकिन प्रधानमंत्री मोदी अपनी अनेक बातचीत में पहले ही कृषि कानूनों को किसानों के लिए बेहतर बता चुके हैं, और किसान नेता इन कानूनों की पूर्ण वापसी से कम पर सहमत होने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में नई संभावित बातचीत का रास्ता क्या हो सकता है? इस सवाल पर किसान नेता ने कहा कि अगर सरकार बातचीत से समस्या का समाधान खोजना चाहती है, तो उसे कुछ कदम आगे बढ़ना होगा। पिछली बातचीत के दौरान किये गए वायदों पर ही बातचीत की सफलता संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि अगर दोनों पक्ष बातचीत के लिए सहमत हो जाते हैं तो मामले का हल निकाला जा सकता है।
इसके पहले सरकार और किसानों में हुई बातचीत के दौरान डेढ़ साल तक कृषि कानूनों को निलंबित रखने और एक कमेटी के जरिए विवादित बिंदुओं पर बातचीत करके समाधान निकालने की बात कही गई थी। सरकार ने किसानों की बिजली कानून से वर्तमान व्यवस्था पर कोई असर न पड़ने का वायदा भी किया था। सरकार के इन प्रस्तावों पर दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बन पाई थी।