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क्या आगे भी मोदी को राहुल फोबिया दिखा पाएंगे कांग्रेस अध्यक्ष?

Mon, 04 Dec 2017 07:58 PM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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rahul gandhi, pm modi
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केंद्र सरकार के कामकाज, गुजरात में 22 साल के भाजपा के शासन, तीन साल के भीतर तीन मुख्यमंत्री के चेहरे, नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बैकफुट पर ला दिया है। 
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वहीं राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों ने जमीन तैयार करके प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को गुजरात, हिमाचल विधानसभा चुनाव में बार-बार अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया। ऐसे में एक सवाल मौजूं है कि क्या राहुल गांधी के पार्टी का अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकार इसी फोबिया के साथ प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष शाह को राजनीतिक रूप से डरा पाएंगे?

राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद हिमाचल और गुजरात चुनाव के नतीजे आएंगे। राहुल गांधी की इस पद पर घोषणा के बाद ही संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो जाएगा। भले ही यह सत्र एक महीने से भी कम समय का है, लेकिन इसके हंगामेदार होने के भी पूरे आसार हैं। इसके अलावा अगले साल केंद्र सरकार कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी को बजट 2018 पेश करके पहली चुनौती देगी। यह चुनौतियां सरकार की तरफ से हैं। इसके नतीजे राहुल गांधी की छवि को बनाएंगे भी और बिगाड़ेंगे भी।
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  भाजपा ने बदली है रणनीति 1. हिमाचल में भाजपा ने चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित न करने का मन बनाया था, लेकिन चुनाव से कुछ समय पहले उसे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की छवि को चुनौती देने के लिए प्रेम कुमार धूमल को भावी चेहरा घोषित करना पड़ा।   2. गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति जातिगत आधार को वरीयता न देने की नहीं थी, लेकिन पार्टी ने टिकट बंटवारे में इसका खासा ध्यान रखा।   3. शुरुआत के चुनाव प्रचार में भाजपा कांग्रेस उपाध्यक्ष पर निजी हमले करने से बचने का प्रयास कर रही थी। चुनाव का पहला चरण नजदीक आते-आते भाजपा को रणनीति बदलनी पड़ी।   4. गुजरात विधानसभा चुनाव में पिछले तीन चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा ही प्रचार के लिए पर्याप्त था। 15 साल बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब पार्टी ने कई दर्जन चेहरों का सहारा लिया है। कई राज्यों के मुख्यमंत्री और दो-तीन दर्जन केंद्रीय मंत्रियों को भी राज्य में कैंप करना पड़ रहा है।   5. राहुल गांधी के 22 से अधिक मंदिरों के दर्शन के बाद भाजपा को खुलकर हिंदुत्व के एजेंडे पर आना पड़ा। यहां तक कि राहुल गांधी के हिंदुत्व पर सवाल खड़ा करने की नौबत आई।
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क्या पैदा होगा राहुल फोबिया?

राहुल गांधी - फोटो : SELF
नया साल, नए अध्यक्ष, नई चुनौती
नया साल 2018 राहुल गांधी के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती लेकर आ रहा है। कर्नाटक, राजस्थान, म.प्र., छत्तीसगढ़, मेघालय के चुनाव होने हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। वहीं म.प्र., छत्तीसगढ़ में पिछले 15 साल से भाजपा की सरकार सत्ता में है। राजस्थान में भाजपा की सरकार है।

इस तरह से तीन राज्य (राजस्थान, म.प्र., छत्तीसगढ़) ऐसे हैं, जहां भाजपा सरकार विरोधी लहर का सामना करेगी। कर्नाटक में कांग्रेस को इस दौर से गुजरना पड़ेगा। इन चुनावों को 2019 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा सकता है।

क्या पैदा होगा राहुल फोबिया?
इस तरह से राहुल गांधी के पास कांग्रेस पार्टी को खड़ा करने का भरपूर अवसर है। पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह राज्य में बड़ा आंदोलन छेड़े हैं। कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार महाराष्ट्र में सक्रिय हैं। कमलनाथ ने पूरी जान लगा रखी है। इस तरह से म.प्र. ऐसा राज्य है, जहां कांग्रेस के पास नेता और चेहरे की कमी नहीं है।

छत्तीसगढ़ नई ऊर्जा के साथ है। राजस्थान में सचिन पायलट लगातार राज्य सरकार की मुश्किल बढ़ा रहे हैं। अशोक गहलोत पार्टी का चर्चित चेहरा हैं। पार्टी के पास सीपी जोशी, गिरजा व्यास समेत तमाम चेहरे हैं। यही स्थिति कर्नाटक में भी है। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि क्या टीम राहुल गुजरात विधानसभा चुनाव की तरह इन राज्यों में भी भाजपा के माथे पर बल ला पाएगी?
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