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200 साल बाद सुलझेगा अयोध्या का मामला, क्या इतिहास रचेगी देश की सर्वोच्च अदालत

Rama Solanki Published by: रमा सोलंकी Updated Wed, 16 Oct 2019 08:02 PM IST

सार

  • भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति, योग्यता और शक्तियां 
  • कौन है अयोध्या मामले के पंच परमेश्वर 
  • न्यायमूर्ति श्री रंजन गोगोई का सफर 
  • मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के अहम फैसले 
  • क्या इतिहास रचने जा रहे है जस्टिस रंजन गोगोई 
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सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर सुनवाई - फोटो : Shutterstock

हमारे देश में कानून बनाने, उसे लागू करने और संरक्षण के लिए बेहद स्पष्ट शब्दों में संस्थान पारिभाषित हैं। विधायिका का कार्य कानून बनाना है तो न्यायपालिका की जिम्मेदारी इसका पालन सुनिश्चित रखना है। इसके लिए देशभर में कई स्तरों पर न्यायालय बनाए गए हैं। इनमें सबसे बड़ी अदालत है सर्वोच्च न्यायालय और इसके मुखिया को भारत का मुख्य न्यायाधीश कहा जाता है। संविधान के अनुच्छेद 124 में उच्चतम न्यायालय के गठन के संबंध में प्रावधान है। इसकी भूमिका संघीय न्यायालय और भारतीय संविधान के संरक्षक की है।


सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 26 जनवरी 1950 को हुई थी, लेकिन यह 28 जनवरी 1950 में क्रियान्वित हुआ। सर्वोच्च न्यायालय, अपीलीय न्यायालय और परामर्श न्यायालय के तौर पर कार्य करता है। सेना के मामलों को छोड़कर यह संविधान संरक्षक के तौर पर भी कार्य करता है। संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय के साथ देश का अंतिम अपीलीय न्यायालय भी है।



भारत के पहले मुख्य न्यायधीश एसजे कनिया थे। वर्ष 2018 में तीन अक्टूबर को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने 46वें चीफ जस्टिस के तौर पर यह जिम्मेदारी संभाली। तो आइए, जानते हैं कि कैसे काम करता है देश का सर्वोच्च न्यायालय और कैसे होती है भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति:

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सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर सुनवाई - फोटो : Shutterstock
हमारे देश में कानून बनाने, उसे लागू करने और संरक्षण के लिए बेहद स्पष्ट शब्दों में संस्थान पारिभाषित हैं। विधायिका का कार्य कानून बनाना है तो न्यायपालिका की जिम्मेदारी इसका पालन सुनिश्चित रखना है। इसके लिए देशभर में कई स्तरों पर न्यायालय बनाए गए हैं। इनमें सबसे बड़ी अदालत है सर्वोच्च न्यायालय और इसके मुखिया को भारत का मुख्य न्यायाधीश कहा जाता है। संविधान के अनुच्छेद 124 में उच्चतम न्यायालय के गठन के संबंध में प्रावधान है। इसकी भूमिका संघीय न्यायालय और भारतीय संविधान के संरक्षक की है।

सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 26 जनवरी 1950 को हुई थी, लेकिन यह 28 जनवरी 1950 में क्रियान्वित हुआ। सर्वोच्च न्यायालय, अपीलीय न्यायालय और परामर्श न्यायालय के तौर पर कार्य करता है। सेना के मामलों को छोड़कर यह संविधान संरक्षक के तौर पर भी कार्य करता है। संविधान के अनुच्छेद 129 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय के साथ देश का अंतिम अपीलीय न्यायालय भी है।

भारत के पहले मुख्य न्यायधीश एसजे कनिया थे। वर्ष 2018 में तीन अक्टूबर को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने 46वें चीफ जस्टिस के तौर पर यह जिम्मेदारी संभाली। तो आइए, जानते हैं कि कैसे काम करता है देश का सर्वोच्च न्यायालय और कैसे होती है भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति:

रंजन गोगोई - फोटो : PTI

कैसे होती है मुख्य न्यायधीश की नियुक्ति

  • संविधान के अनुच्छेद 124 (2) के अनुसार भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति होती है।
  • उच्चतम न्यायालयों के सभी न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। 
  • मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों से राय भी ले सकते है।
  • मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में वरिष्ठता के सिद्धांत का पालन होता है।
  • मुख्य न्यायाधीश आगामी मुख्य न्यायधीश के नाम का प्रस्ताव आगे बढ़ा सकते हैं।

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सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की योग्यता 

  • सर्वप्रथम वो भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • कानून और संविधान का जानकार होना चाहिए।
  • किसी भी उच्च न्यायालय में पांच वर्ष तक न्यायाधीश रहा हो। 
  • उच्च न्यायालय का दस वर्ष तक का अधिवक्ता का अनुभव होना चाहिए।

ranjan gogoi - फोटो : अमर उजाला

मुख्य न्यायाधीश की शक्तियां 

  • यह प्रशासनिक प्रमुख होता है।
  • कोर्ट के नियम-कायदे तय करता है।
  • पीठ का गठन करता है।
  • सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह करता है कि कौन सा केस किस जज को दिया जाएगा इस चीज का निर्धारण करता है।

ranjan gogoi

मुख्य न्यायाधीश को पद से कैसे हटाया जा सकता है 

  • 65 साल की उम्र तक यह कार्य कर सकता है।
  • राष्ट्रपति को त्यागपत्र सौंपने पर।
  • संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित प्रस्ताव पर राष्ट्रपति हटा सकता है।
साल 1950, जनवरी 26 को भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश एस जे कनिया बने थे। अब तक 46  मुख्य न्यायाधीश बन चुके है और देश के 46वें मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई है।

ranjan gogoi

न्यायमूर्ति श्री रंजन गोगोई का सफर 

पूर्व मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के बाद तीन अक्टूबर 2018 को जस्टिस रंजन गोगोई ने पदभार ग्रहण किया। वे इस पद पर 17 नवंबर 2019 तक रहेंगे। रंजन गोगोई के पिता केशब चंद्र गोगोई असम में कांग्रेस के बड़े नेता रहे हैं साथ ही 1982 में केशब चंद्र गोगोई मुख्यमंत्री भी रहे। रंजन गोगोई एक संम्पन्न परिवार से निकल कर आते हैं।

रंजन गोगोई - फोटो : PTI

मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगोई का जीवन परिचय 

"मैं जैसा हूं वैसा ही रहूंगा" मैं अब बदल नहीं सकता हूं। कार्यभार ग्रहण करने के बाद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री रंजन गोगोई ने इन शब्दों के साथ शुरुआत की। रंजन गोगोई प्रखर व्यक्तित्व के व्यक्ति हैं। वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले पूर्वोत्तर के न्यायाधीश हैं। जस्टिस गोगोई का 13 महीने से कुछ अधिक अवधि का कार्यकाल होगा और वह 17 नवंबर, 2019 को सेवानिवृत होंगे।
  • रंजन गोगोई का जन्म 18 नवंबर 1954 को असम के डिब्रूगढ़ में हुआ।
  • उनकी शुरूआती शिक्षा डिब्रूगढ़ के डॉन बास्को स्कूल से हुई। 
  • इंटरमीडिएट की पढ़ाई कॉटन कॉलेज गुवाहाटी से हुई।
  • उसके बाद सेंट स्टीफैन कॉलेज से इतिहास में बीए की पढ़ाई पूरी की।
  • दिल्ली विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस से कानून की पढ़ाई पूरी की।
  • 1978 में गुवाहाटी के हाई कोर्ट से अपनी वकालत की प्रैक्टिस शुरू की।
  • 28 फरवरी 2001 को गुवाहाटी हाई कोर्ट के न्यायाधीश बने।
  • 9 सितम्बर 2011 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने, इस पद पर वो करीब एक साल तक रहे।
  • इसके बाद 23 अप्रैल 2012 को सुप्रीम कायत के न्यायाधीश बने।
  • 3 अक्टूबर 2018 को वो देश के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए।

 

cji - फोटो : PTI

मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगोई के अहम फैसले 

वर्ष 2015 में उनका एक महत्वपूर्ण फैसला आया जिसके तहत सरकारी विज्ञापनों में केवल देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और भारत के प्रधान न्यायाधीश की ही तस्वीरें होंगी। 2016 में में जस्टिस रंजन ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज मार्कण्डेय काटजू को अवमानना का नोटिस भेजा था। जस्टिस काटजू ने अपने फेसबुक पर सौम्या रेप केस और हत्या के मामले में आये शीर्ष अदालत के फैसले की आलोचना की थी। इस फैसले में कोर्ट ने आरोपी को रेप का आरोपी दोषी करार दिया था मगर हत्या का नहीं। यह फैसला जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनाया था।
  • चुनाव के दौरान उम्मीदवारों को संपत्ति, शिक्षा और उन पर चल रहे मुक़दमों का ब्यौरा देने का आदेश वाला फैसला।
  • उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को भी निरस्त कर दिया था, जिसमे कौन बनेगा करोड़पति शो से अमिताभ बच्चन की कमाई के आंकलन पर रोक लगा थी। 
  • सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में उन्होंने कोलकाता हाई कोर्ट के जस्टिस कर्णन को 6 महीने कैद की सजा।
  • असम के एनआरसी बनाने के अहम फैसले देने वाली पीठ में रहे हैं।
  • जस्टिस गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में से एक थे जो 12 जनवरी 2018 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आये और सुप्रीम कोर्ट के कामकाज और न्यायापालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए। उनके साथ सेवानिवृत जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ अन्य तीन न्यायाधीश थे, जिन्होंने संवाददाताओं को संबोधित भी किया था।
  • जस्टिस गोगोई उन 11 जजों में शामिल थे जिन्होंने आपकी संपत्ति का आंकड़ा सार्वजानिक किया और उसकी घोषणा की थी।

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

अयोध्या मामले में फैसला देने वाले जज कौन हैं?

फैसला सुनाने वाली संवैधानिक बेंच में पांच जज शामिल हैं, जिसका नेतृत्व खुद मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई कर रहे हैं।
शेष चार सदस्य हैंः
  • जस्टिस एसए बोबडे
  • जस्टिस अशोक भूषण, 
  • जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और
  •  जस्टिस एस अब्दुल नजीर। 

ranjan gogoi - फोटो : पीटीआई

क्या जस्टिस रंजन गोगोई सुनाएंगे देश का सबसे ऐतिहासिक फैसला?

गौरतलब है कि आगामी 17 नवंबर को जस्टिस रंजन गोगोई सेवानिवृत हो जाएंगे और उससे पहले ये फैसला आना बहुत जरूरी है क्योंकि अगर इसमें कोई भी विलंब होगा तो फिर से नई बेंच बनेगी और इस मामले की सुनवाई शुरू होगी। समय, सुनवाई और समझ का फेरबदल भी होगा। 17 नवंबर को रविवार का दिन है जिसके चलते उससे पहले यानि 16 नवंबर तक ही इस फैसले की उम्मीद लगाई जा रही है।

जस्टिस रंजन गोगोई ने खुद कहा, "आप सबको निर्धारित टाइमलाइन का पालन करना होगा, 18 अक्टूबर के आगे सुनवाई नहीं हो सकती, इस तारीख के बाद हमे फैसला देने के लिए बस चार हफ्ते मिलेंगे इतने समय में इस फैसले को लिखना एक चमत्कार जैसा ही होगा" और इसके साथ अयोध्या केस में 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी करने का आदेश जारी किया।

इस मामले को अंग्रेज भी नहीं सुलझा पाये, क्या जस्टिस गोगोई 203 साल पुराने केस को अंजाम दे पाएंगे, उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है कुछ दिन बाद हर जज अपना फैसला सुनाएगा और जाहिर सी बात है इस फैसले के साथ ही एक नया इतिहास भी लिखा जाएगा।
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