कर्नाटक में आखिरकार भाजपा सरकार बनाने में कामयाब हो गई। बीएस येदियुरप्पा को तीसरी बार राज्य की कमान मिल गई है। 2007 में 12 नवंबर को येदियुरप्पा राज्य के पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, वह ज्यादा दिन तक इस कुर्सी पर बने नहीं रह पाए और जेडीएस से मंत्रालयों के प्रभार को लेकर हुए विवाद के बाद 19 नवंबर 2007 को ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
अटल जी की तरह गठबंधन सरकार को कामयाब करने का मौका है
अटल बिहारी वाजपेयी
ठीक इसी तरह भाजपा के कद्दावर नेता अटल बिहारी वाजपेयी भी पहली बार देश के प्रधानमंत्री महज 13 दिनों के लिए ही बने थे। उन्हें भी आपसी खींचतान के बाद इस्तीफा देना पड़ा था। लेकिन इसके बाद अटल जी दूसरी बार 13 महीनों के लिए सरकार बने और बाद में तीसरी बार 5 साल तक देश की कमान संभाली। येदियुरप्पा के पास अब अटल जी की तरह गठबंधन सरकार को कामयाब करने का मौका है।
इतिहास तो यही कह रहा
Karnataka BJP Celebration
1996 के आम चुनावों में भाजपा को सबसे अधिक सीटें मिलीं। अटल देश में पहली बार प्रधानमंत्री बने। हालांकि उनका यह सफर महज 13 दिनों का रहा और उन्होंने अपनी अल्पमत सरकार का त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंप दिया। 1998 में भाजपा फिर दूसरी बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और अटल बिहारी वाजपेयी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। इस बार भी वह लंबी पारी नहीं खेल सके। 13 माह बाद जयललिता के समर्थन वापस लेने से उनकी सरकार गिर गयी। 1999 के आम चुनाव में भाजपा ने फिर अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सबसे अधिक सीटें हासिल की। वाजपेयी के नेतृत्व में ही 13 दलों की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया।
येदियुरप्पा की यह है तीसरी पारी
Karnataka Election 2018
येदियुरप्पा भी पहली बार महज 7 दिनों के लिए सरकार संभाली। बाद में 3 साल के लिए और अब तीसरी बार फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली है। अटल ने तो अपने कुशल और हंसमुख नेतृत्व की वजह से 13 दलों की गठबंधन सरकार 5 साल तक चलाकर देश की राजनीति को एक नया मोड़ दिया। येदियुरप्पा के पास भी कुशल नेतृत्व दिखाते हुए दक्षिण की राजनीति में एक धूमकेतु बनने का अवसर है। येदियुरप्पा के पास बहुमत साबित करते हुए एक बेहतर सरकार देने की चुनौती है। 222 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 112 सीटों के जादुई आंकड़े से भाजपा महज 8 सीटें ही पीछे है। येदियुरप्पा को कर्नाटक में भाजपा का पर्याय माना जाता है। वे दक्षिण भारत की राजनीति के एक प्रमुख स्तंभ हैं। भाजपा ने हालिया चुनाव में 104 सीटें हासिल की है।
केंद्र में है भाजपा सरकार
BJP Parliamentary Board
2007 और 2008 के दौरान केंद्र में संप्रग की सरकार थी। लेकिन अभी केंद्र में भाजपा की सरकार है। लिहाजा इसका फायदा भी निश्चित तौर पर येदियुरप्पा को हो सकता है। तीसरी पारी सही ढंग से खेलने पर येदियुरप्पा केंद्र की राजनीति में भी अहम हो सकते हैं। कई राजनीतिक विश्लेषक कर्नाटक चुनाव को तो एक तरह से 2019 की राजनीतिक तस्वीर भी कह रहे हैं।
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