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Arvind Kejriwal: अब पुराने अवतार में दिखेंगे केजरीवाल, क्या फिर मिल सकेगी आंदोलनकारी छवि: भाजपा ने बोला हमला

सार

Arvind Kejriwal: मुख्यमंत्री बनने के बाद अरविंद केजरीवाल की आंदोलनकारी वाली छवि बहुत पीछे छूट चुकी है, लेकिन एक बार फिर वे उसी छवि की तलाश करते हुए दिखाई देंगे जो उनकी सबसे बड़ी ताकत हुआ करती थी। लेकिन बड़ा प्रश्न यही है कि शराब घोटाले के गंभीर आरोपों में घिरने के बाद भी क्या वे अपनी पुरानी छवि वापस पा सकेंगे?
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अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अरविंद केजरीवाल एक बार फिर पुराने 'अवतार' में दिखाई देंगे। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अब वे सरकारी आवास सहित सभी सरकारी सुविधाएं भी छोड़ देंगे। वे दिल्ली की गलियों में एक बार फिर उसी तरह खाक छानते हुए दिखाई देंगे जिस तरह वे अपने आंदोलन के दिनों में किया करते थे। यानी अपनी आंदोलनकारी वाली छवि दुबारा हासिल करने के लिए वे वह सब कुछ करते हुए दिखाई देंगे जो कभी उनकी पहचान हुआ करती थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी वह छवि बहुत पीछे छूट चुकी है, लेकिन एक बार फिर वे उसी छवि की तलाश करते हुए दिखाई देंगे जो उनकी सबसे बड़ी ताकत हुआ करती थी। लेकिन बड़ा प्रश्न यही है कि शराब घोटाले के गंभीर आरोपों में घिरने के बाद भी क्या वे अपनी पुरानी छवि वापस पा सकेंगे? भाजपा ने अरविंद केजरीवाल की सुविधाओं को छोड़ने की बात को उनकी पुरानी 'नाटकीयता भरी राजनीति की पुस्तक में एक नया पृष्ठ' करार दिया है। 

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केजरीवाल की यह पूरी कवायद अपनी साख को मजबूत करना बताया जा रहा है। शराब घोटाले के बाद केजरीवाल की साख को गंभीर नुकसान पहुंची है। उनकी पूरी राजनीति उस आंदोलन की कमाई हुई है जिस पर जनता को भारी भरोसा था। अन्ना हजारे से जुड़े आंदोलन की अपनी एक पवित्रता थी जिससे उससे जुड़े सभी लोगों के व्यक्तित्व को एक चमक मिल रही थी। अब जबकि जनता के सामने अरविंद केजरीवाल का दस साल का शासन है, उनके कामकाज, कथनी-करनी लोगों के सामने है, उस पर लोगों का कितना भरोसा हो पाएगा, यह कहना कठिन है।  

दो वर्गों का अंतर 
राजनीतिक विश्लेषक कुमार राकेश ने अमर उजाला से कहा कि दिल्ली में मतदाताओं में मोटे तौर पर दो तरह का विभाजन किया जा सकता है। एक वर्ग ऐसा है जिसे केजरीवाल की योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिलता। बेहतर आर्थिक स्थिति के कारण संभवतः उसे अरविंद केजरीवाल की योजनाओं की आवश्यकता भी नहीं है। लेकिन वहीं, इसी दिल्ली में एक दूसरा वर्ग भी है जो अरविंद केजरीवाल सरकार की योजनाओं का लाभार्थी है। उसके घर में आज भी मुफ्त बिजली, पानी की सुविधा पहुंच रही है। उसकी महिलाएं दिल्ली सरकार की बसों में मुफ्त में सफर कर रही हैं। उसके बच्चे को सरकारी स्कूलों में पहले से बेहतर शिक्षा मिल रही है।   
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कुमार राकेश ने कहा कि पहला तबका आम आदमी पार्टी सरकार के दूसरे टर्म में ही उससे दूर जा चुका था। इसी वर्ग के दूर जाने के कारण केजरीवाल के वोट प्रतिशत में कमी आई थी। उसकी सीटों में भी कुछ कमी आई तो इसका श्रेय इसी वर्ग को दिया जा सकता है। संभवतः यह वर्ग लौटकर मुख्यरूप से भाजपा के पास और आंशिक तौर पर कांग्रेस के पास वापस जा चुका है।  

लेकिन जो गरीब वर्ग 2020 के चुनाव में केजरीवाल के साथ था, अब तक की परिस्थितियां यही दिखाती हैं कि वह आज भी उनके साथ बना हुआ है। केजरीवाल की पुराने अवतार में आने की कोशिश उनके लिए किसी नए वोटर वर्ग को भले न तैयार करे, लेकिन निचले वर्ग में एक बार फिर वे अपने प्रति  विश्वास पैदा कर सकते हैं। चूंकि मतदाताओं में सबसे बड़ा वर्ग इसी श्रेणी का है, फिलहाल केजरीवाल की राजनीतिक सत्ता को कोई चुनौती मिलती नहीं दिखाई देती। 

केजरीवाल की ताकत बरकरार- आप समर्थक
आम आदमी पार्टी नेता अमरनाथ शुक्ला ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल की छवि उन लोगों के बीच आज भी उतनी ही मजबूत है जिन लोगों के बीच आम आदमी पार्टी ने एक उम्मीद पैदा किया है। जिनके बच्चों को शिक्षा का अवसर नहीं मिलता था, आज उन्हें बेहतर शिक्षा मिल रही है तो वे आम आदमी पार्टी से दूर क्यों जाएंगे। 



उनका कहना है कि दिल्ली में रहने वाला हर दूसरा मतदाता यूपी-बिहार या मध्य प्रदेश से आता है। जब यही मतदाता देख रहा है कि विपक्षी दलों की सरकारें अपने राज्यों में आज भी दिल्ली के स्तर की शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं दे पा रही हैं तो वह दिल्ली में उनके बेहतर वादे पर भरोसा क्यों करेगा। आप नेता का दावा है कि केजरीवाल का जादू उनके मतदाताओं-समर्थकों के बीच बरकरार है। उन्होंने कहा कि घोटालों के आरोपों की सच्चाई अदालत के निर्णय के बाद सामने आएगी, लेकिन फिलहाल गरीबों के बीच आप की लोकप्रियता बरकरार है और विधानसभा चुनावों में यह बात साबित भी हो जाएगी।   

भाजपा ने लगाए आरोप
भाजपा नेता खेमचंद शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल की पूरी सियासत नाटकीयता से भरी रही है। वे जमीनी नेता होने का दिखावा अवश्य करते हैं, लेकिन जमीन से जुड़े नहीं रहते। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल सत्ता में आने के पहले जिन सुविधाओं (बंगला, गाड़ी और भारी भरकम सुरक्षा) को लेने से इनकार करते थे, मुख्यमंत्री बनते ही वे अपनी ही बातों को झुठलाते हुए सभी सुविधाएं लेना शुरू कर दिया। 

कभी नीली वैगन आर में चलने वाले केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बनते ही करोड़ों की गाड़ी पर चलना शुरु कर दिया, बंगला न लेने की बात करने के बाद अपने आवास पर करोड़ों रुपये खर्च कर एक महल में बदल दिया, महात्मा गांधी की बात करते-करते लोगों को एक बोतल के साथ दूसरी फ्री देकर युवाओं को नशे की गर्त में धकेलना शुरु कर दिया। उन्होंने कहा कि अब अरविंद केजरीवाल की पुरानी छवि कभी वापस नहीं आएगी क्योंकि  अब लोग उनकी असलियत पहचान चुके हैं।     

'दिल्ली के लोग नहीं सहेंगे अपने बच्चों के भविष्य के साथ ये खिलवाड़' 
खेमचंद शर्मा ने कहा कि आम आदमी पार्टी जिस व्यवस्था को बेहतर बताने का दावा करती है, उसकी सच्चाई यह है कि इस वर्ष नवीं कक्षा में एक लाख बच्चे केवल इसलिए फेल कर दिये गए क्योंकि दिल्ली सरकार उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट कर अपना रिजल्ट खराब नहीं करना चाहती थी। ग्यारहवीं के 54 हजार बच्चों को ओपेन स्कूल से पढ़ने के लिए मजबूर कर दिया गया और उन्हें दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ने दिया गया। उन्होंने कहा कि ये बच्चे भी दिल्ली की जनता के ही हैं और वे अपने बच्चों के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

बीजेपी नेता ने कहा कि अब एक बार फिर पुराने अवतार में वापस आने की बात करना केजरीवाल की नाटकीयता की राजनीति में एक नया अध्याय है जिसे अब कोई भी स्वीकार नहीं करेगा। भाजपा नेता ने दावा किया कि इस बार विधानसभा चुनाव में केजरीवाल को करारी हार का सामना करना पड़ेगा।

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