विधायक अब्दुल करीम चौधरी ने उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर उप-मंडल के कई ब्लॉकों का दौरा करने के बाद यह टिप्पणी की, जहां उनके वफादारों ने हाल ही में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पंचायत चुनाव लड़ा था और 11 जुलाई को परिणाम घोषित होने के बाद एक प्रतिद्वंद्वी गुट के समर्थकों को कथित तौर पर पीटा गया था।
उन्होंने कहा, 'अगर मेरी पार्टी का कोई धड़ा आम लोगों के खिलाफ अत्याचार करता है, जिनमें से कई मेरे वफादार हैं। अगर पार्टी के उच्च पदाधिकारियों के हस्तक्षेप के बिना मारपीट और आगजनी की घटनाएं बिना किसी रोक-टोक चलती रहीं तो मैं राज्यसभा चुनाव में मतदान से दूर रहने के लिए मजबूर हो जाऊंगा।'
उन्होंने कहा, 'मैं भविष्य में विधानसभा में राज्य सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले किसी भी विधेयक का समर्थन नहीं करूंगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मेरे बार-बार अपील करने के बावजूद इस्लामपुर में बिगड़ती स्थिति पर ध्यान देने में विफल रही हैं। अगर स्थिति में कोई सुधार नहीं होता है, अगर मेरी बातों पर ध्यान नहीं दिया जाता है तो मैं इस सरकार का विरोध करना शुरू कर दूंगा।'
चौधरी की नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, 'उन्हें सार्वजनिक रूप से पार्टी के खिलाफ इस तरह से नहीं बोलना चाहिए था। मैं बस इतना कह सकता हूं कि नेतृत्व इस मुद्दे पर फैसला करेगा।' चौधरी का जिला टीएमसी अध्यक्ष कन्हैयालाल अग्रवाल के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा है।
इस्लामपुर के विधायक चौधरी ने आरोप लगाया था कि नीतिगत निर्णय लेने के मामले में पार्टी द्वारा उनकी अनदेखी की जा रही है और वह तीन महीने पहले उत्तर बंगाल में अपने संपर्क कार्यक्रम के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से नहीं मिल सके।