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Defence: क्या रक्षा विभाग में खत्म होंगी 50 हजार सिविल जॉब; आयुध और सेना इकाइयों में अनुकंपा नियुक्ति हुई बैन!

सार

Defence compassionate: अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना है, रक्षा मंत्रालय के तहत लगभग 50 हजार सिविलियन वैकेंट पोस्ट भरने पर बैन लगा है। 
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रक्षा मंत्रालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में 200 साल पुराने आयुध कारखानों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हथियार, गोला-बारूद, तोपखाना, बुलेट प्रूफ जैकेट, बैलेस्टिक हेलमेट और अन्य आवश्यक उपकरणों सहित सभी प्रकार के ट्रूप कम्फर्ट आइटम तैयार करने वाले हाथों को अपना भविष्य सुरक्षित नजर नहीं आ रहा। 30 सितंबर, 2021 को आयुध निर्माणी बोर्ड के तहत सरकारी संगठन के तौर पर संचालित होने वाले 41 आयुध कारखानों को 7 कंपनियों में विभाजित कर दिया था। इसके बाद आयुध कारखानों को पर्याप्त ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। 
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अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना है, रक्षा मंत्रालय के तहत लगभग 50 हजार सिविलियन वैकेंट पोस्ट भरने पर बैन लगा है। मंत्रालय के छह नवंबर 2024 के एक पत्र में भी कहा गया है कि 15 जुलाई 2022 को खाली पदों को भरने से संबंधित जो निर्णय लिया गया था, वह पेंडिंग है। इसके बाद 24 अक्तूबर 2024 के एक नोट में रक्षा मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि जिन खाली पदों के भरने पर रोक लगी है, उन्हें किसी भी स्थिति में भरा नहीं जा सकता। यह निर्णय शीर्ष स्तर पर लिया गया है। बतौर श्रीकुमार, ऐसे में अब आयुध कारखानों/सेना इकाइयों में अनुकंपा नियुक्ति पर भी बैन लग गया है। सात आयुध निर्माणी निगमों में से पांच निगमों में तो स्थायी सीएमडी तक नहीं हैं। आयुध निर्माणी निगमों में सीएमडी पद और निदेशक पद के लिए आईओएफएस अधिकारियों के नामों पर विचार नहीं किया जाता है।   

श्रीकुमार का कहना है, हथियार इंडस्ट्री में निचले स्तर का स्टाफ संकट में आ गया है। रक्षा मंत्रालय के सशस्त्र बलों में 11 लाख से अधिक सैनिक हैं और लगभग 3 लाख नागरिक कर्मचारी हैं। ये कर्मचारी, आयुध कारखानों, डीआरडीओ, सेना, नौसेना और वायु सेना में काम कर रहे हैं। 
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डिफेंस सिविलियन कर्मचारियों का मानना है कि रक्षा मंत्रालय, वर्दीधारी कर्मियों को जो महत्व देता है, वह उन्हें सभी मामलों में नहीं दिया जा रहा है। अन्य मंत्रालयों के मृत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। रक्षा मंत्रालय ने आयुध कारखानों और अब सेना इकाइयों में भी अनुकंपा नियुक्ति पर कृत्रिम प्रतिबंध लगा दिया है। वजह, रक्षा मंत्रालय ने 50 हजार से ज्यादा सिविलियन पदों को खत्म करने का प्रस्ताव दिया है। 

श्रीकुमार कहते हैं कि आयुध कारखानों के आईओएफएस अधिकारी भी नाराज हैं, क्योंकि सात आयुध निर्माणी निगमों में से पांच निगमों में कोई स्थायी सीएमडी नहीं है। सीएमडी पद और निदेशक पद के लिए आईओएफएस अधिकारियों को मौका नहीं दिया जा रहा। आईओएफएस अधिकारियों में से एक ने पीईएसबी के फैसले को चुनौती दी है कि वरिष्ठ होने के बावजूद उनका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया है।

 एक वरिष्ठ आईओएफएस अधिकारी के अनुसार, जब 200 से अधिक एसएजी स्तर के आईओएफएस अधिकारी उपलब्ध हैं तो रक्षा मंत्रालय आयुध निर्माणी निगमों में सीएमडी और निदेशकों के चयन के लिए पीईएसबी के पास क्यों गया है। यूपीएससी के माध्यम से चुने गए आईओएफएस अधिकारियों को नजरअंदाज करते हुए, पीईएसबी इन उच्च स्तरीय पदों के लिए आउट साइडर्स के नामों को सूचीबद्ध कर रहा है जो बहुत जूनियर हैं। उन्होंने कभी आयुध कारखानों में काम नहीं किया है। वर्तमान बोर्ड अस्थायी हैं और यूपीएससी की सूची से आईओएफएस कैडर को समाप्त करने के बाद, सरकार को सीधे आईओएफएस अधिकारियों को सीएमडी और निदेशक के रूप में मानना चाहिए था। आयुध कारखानों के निगमीकरण के तीन साल के भीतर ही यह हश्र हो गया है। डिफेंस सिविलियन कर्मचारियों के कई मुद्दे हैं जो अनसुलझे हैं। एआईडीईएफ ने 24 नवंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एक विरोध पत्र सौंपा है। इसमें 16 प्रमुख मुद्दे बताए गए हैं, जिनमें कर्मियों के साथ भेदभाव किया जाता है। 

जब यह पूछा गया है कि क्या अनुकंपा नियुक्ति भी भर्ती पर प्रतिबंध के अंतर्गत आती है।  खाली पदों को भरने बाबत रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि ये पॉलिसी मैटर है। दो साल पहले सरकार में शीर्ष स्तर पर ये निर्णय लिया गया था।मंत्रालय के 15 जुलाई 2022 के पत्र में दर्शाए गए पदों को किसी भी परिस्थिति में नहीं भरने की बात कही गई है।  इनके भरने पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में निर्णय लिया गया है। 
 
एआईडीईएफ ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भेजे पत्र में आरोप लगाया है, आयुध कारखानों के मृत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए डीडीपी द्वारा निर्देश जारी करने में अनुचित देरी की जा रही है। सेना इकाइयों सहित रक्षा प्रतिष्ठानों में रिक्त पड़े पदों को भरने में भेदभाव हो रहा है। रक्षा मंत्रालय अपने असैनिक कर्मचारियों के साथ लगातार भेदभाव करता रहता है। अन्य मंत्रालयों के वर्दीधारी कर्मियों और असैनिक कर्मचारियों की तुलना में उनके साथ दूसरे दर्जे के नागरिक जैसा व्यवहार किया जाता है। 

एआईडीईएफ ने दिए हैं ये 16 उदाहरण ... 
1. आयुध कारखानों का निगमीकरण करना और आयुध कारखानों को कार्य-भार और अन्य सहायता देने से वंचित करना। मानद प्रतिनियुक्ति पर रक्षा विभाग के सिविलियन कर्मचारियों की सेवा शर्तों/लाभों/कल्याण की सुरक्षा पर रक्षा मंत्री और मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष दिए गए आश्वासन को बरकरार नहीं रखना। 
2. एमओडी/डीडीपी द्वारा अधिसूचना का प्रकाशन न करना। आयुध निर्माणी कर्मचारियों की पूर्व स्थिति को बनाए रखना। जो कर्मचारी, 41 आयुध कारखानों में प्रतिनियुक्ति पर हैं, उनकी सेवानिवृत्ति तक उन्हें केंद्र सरकार के कर्मचारी / रक्षा नागरिक कर्मचारी के रूप में बनाए रखना। सात आयुध निर्माणी निगमों में संविदा/निश्चित अवधि की नियुक्ति के परिणामस्वरूप शोषण और दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। इनमें कर्मचारी मारे जाते हैं और गंभीर रूप से घायल होते हैं।
3. रक्षा अनुसंधान में अधिक से अधिक निजी क्षेत्र को शामिल करने और उन्हें डीआरडीओ प्रयोगशालाओं और इसकी सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति देने के इरादे से डीआरडीओ का पुनर्गठन करना। 
4. पुनर्गठन/एनपीसी सिफारिशों के नाम पर डीजीक्यूए को छोटा करना।
5. एआईडीईएफ द्वारा बार-बार अनुरोध के बावजूद रक्षा मंत्री, रक्षा सचिव और सचिव (डीपी) द्वारा एआईडीईएफ को बैठकें न होने देना। 
6. रक्षा मंत्रालय में लगभग 3 लाख सिविलियन कर्मियों के पद रिक्त पड़े हैं। इनमें नौसेना के 9,218 पद, वायु सेना के 8,921 पद और भारतीय सेना के 35,767 पद समाप्त करने का निर्णय। इसके परिणामस्वरूप भर्ती पर प्रतिबंध लगाना। 
7. अनुकंपा नियुक्ति पर रोक लगने से मृत रक्षा नागरिक कर्मचारियों के परिवार वंचित हो गए हैं।
8. सभी श्रेणी के सिविलियन कर्मचारियों के कैडर रिव्यू पर प्रतिबंध लगाया गया है।
9. भेदभावपूर्ण बोनस भुगतान और ईएमई के रक्षा नागरिक कर्मचारियों और टीसीएल के तहत आयुध कारखानों में डीम्ड प्रतिनियुक्ति पर कर्मचारियों को 30 दिनों से कम न्यूनतम वैधानिक बोनस का भुगतान। 
10. सहकारी सोसायटी अधिनियम का उल्लंघन करके सहकारी समितियों में निदेशक मंडल के रूप में चुने जाने के लिए कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जाना।
11. नेवल डॉकयार्ड मुंबई के पीबी पाणिग्रही को नौसेना नागरिक कर्मचारी सहकारी बैंक के निदेशक पद पर चुने जाने के कारण अवैध रूप से उन्हें 6 महीने से अधिक समय तक निलंबित रखना।
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12. 8 वर्षों से अधिक समय से विभागीय परिषद (जेसीएम) की बैठकें आयोजित न होना, जबकि जेसीएम योजना के तहत एक वर्ष में 3 बैठकें आयोजित की जानीं चाहिए।
13. रक्षा मंत्रालय/डीडीपी के प्रशासनिक प्रभागों के संयुक्त सचिवों की अध्यक्षता में होने वाली अतिरिक्त बैठक व्यवस्था का आयोजन न होना। 
14. सेवा मामलों में मुकदमों की बहुलता (10 से अधिक कैट निर्णयों के बावजूद, औद्योगिक कर्मचारियों का ड्रेस भत्ता, केवल याचिकाकर्ताओं को दिया जाता है)
15. सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद 7वें सीपीसी वेतन में रात्रि ड्यूटी भत्ते का भुगतान न करना। 
16. प्रशिक्षण केंद्रों और अस्पतालों में काम करने वाले रक्षा नागरिक कर्मचारियों को ट्रेड यूनियनों के अधिकारों से वंचित करना।
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