लेकिन एक पूर्व और एक वर्तमान विधायक के घरों को क्यों आग लगाई? जाटव बस्ती में रहने वाले रवि कुमार कहते हैं, "उनके घर में जातीय कारणों से आग लगाई गई। उस दिन यहां जितने भी घर जलाए गए वो दलितों के थे।" विजय सिंह कहते हैं, "ये लोग दलितों को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते हैं।" महाभारत के पांडवों में से एक भीम की पत्नी हिडिंबा का मायका बताया जाने वाला हिंडौन अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। लेकिन एक तथ्य ये भी है कि
दलितों के बंद के दिन यानी दो अप्रैल को भी शहर में तोड़फोड़ की कई वारदातें हुईं, जिसमें रेलवे स्टेशन के एक हिस्से में आग का लगना और सात सरकारी बसों को फूंका जाना भी है।
हरि चरण दावा करते हैं कि कुछ लोग मुंह बांधे उनकी रैली में शामिल हुए और उन्होंने ही पूरा उपद्रव मचाया। कलेक्टर का कहना है कि प्रशासन ने एक विशेष जांच दल तैयार किया है जो उन लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहा है जिन्होंने दो तारीख को तोड़-फोड़ की। इनमें से कुछ लोग बाहर के भी बताए जा रहे हैं। हालांकि हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर राज्यसभा पहुंचने वाले किरोड़ीलाल मीणा इस पूरे हंगामे के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताते हैं जो उनके मुताबिक राज्य में भाईचारा और शांति की स्थिति को भंग करना चाहती है। बीजेपी सांसद कहते हैं, "कांग्रेस के पूर्व मंत्री के नेतृत्व में दो तारीख को बाजार में जो हुड़दंग मचाया गया उसके बाद जो प्रतिक्रिया हुई ये उसका नतीजा है।"
अफवाहों का दौर चलता रहा
किरोड़ीलाल मीणा आज जो खुले तौर पर कह रहे हैं वे बातें पिछले दिनों अफवाहों के रूप में शहर में घूमती रही हैं। भरोसी लाल जाटव के घर के भीतर जाटव हमलावरों के बड़ी तादाद में जमा होने से लेकर - जिनकी संख्या तीन से पांच हजार की बीच घूमती रही, अफवाहें ये भी फैलीं कि जाटवों ने बच्चों की स्कूली बसों पर हमला कर दिया है और ये भी कि वो अस्पताल में मरीजों के सलाइन के ट्यूब काट रहे हैं। मगर पूछने पर पता चला कि न तो किसी ने पांच हजार की भीड़ को देखा था, न स्कूली बस पर हमले को और न ही अस्पताल की ट्यूब को, लेकिन सुना तकरीबन सबने था।