कांग्रेस ने शनिवार को अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक की रिहाई पर सवाल उठाए। वैनडाइक म्यांमार में हथियारों का प्रशिक्षण देने के मामले में आरोपी है। कांग्रेस ने पूछा कि आतंकवाद के आरोपी किसी विदेशी नागरिक को इतनी छूट क्यों दी जा रही है?
जयराम रमेश ने क्या कहा?
कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने इस मामले पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा तब कर रही है, जब वह 'वोट चोरी' के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं को गिरफ्तार कर रही है।
रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा, भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को कल रिहा कर दिया गया। उसे चार महीने के लिए अपने देश लौटने की अनुमति दी गई। आतंकवाद के आरोपी किसी विदेशी नागरिक को इतनी छूट क्यों दी गई?
रमेश ने आगे कहा, यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब सरकार ने पिछले महीने वोट चोरी के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान युवा कार्यकर्ताओं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और गिरफ्तार करने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई। कांग्रेस नेता ने बताया कि मई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की पिछली भारत यात्रा के दौरान यह मुद्दा उठाया गया था। रुबियो इसी सप्ताह फिर भारत आए थे।
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इस मुद्दे को पहले भी उठा चुके रमेश?
वैनडाइक की रिहाई के बाद रमेश ने पिछले महीने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। उन्होंने प्रधानमंत्री को 'समझौता कर चुके प्रधानमंत्री' बताया था। रमेश ने दावा किया था कि अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने मई में भारत का दौरा किया था। उस दौरान भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री के सामने यह मुद्दा उठाया था।
रमेश के मुताबिक, आठ सितंबर को वैनडाइक के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत लगे आरोप हटा दिए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया, यह भारतीय नागरिकों के खिलाफ सरकार की ओर से इस कानून के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग से बिल्कुल अलग है। ऐसे मामलों को जानबूझकर लंबे समय तक खींचा जाता है।
24 सितंबर को वैनडाइक की रिहाई के बाद रमेश ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री भारत के चुनावों, संस्थानों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने में 'विफल' रहे हैं।
अदालत ने वैनडाइक को अमेरिका लौटने की अनुमति क्यों दी?
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को भारत से बाहर रहने की अनुमति बढ़ा दी। अब वे अगले साल 24 फरवरी तक भारत से बाहर रह सकते हैं। यह मामला म्यांमार में हथियारों का प्रशिक्षण देने से जुड़ा है। इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रही है।
विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने सातों विदेशी नागरिकों की अर्जियों पर सुनवाई की। इसके बाद उन्होंने यह आदेश दिया। अदालत की कार्यवाही बंद कमरे में हुई।
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एनआईए ने अदालत से और समय मांगा था। एजेंसी ने कहा कि उसे मामले के कई पहलुओं की जांच करनी है। इसके लिए और समय चाहिए। एजेंसी के वकील राहुल त्यागी ने इस संबंध में दलीलें दीं। अदालत ने वैनडाइक को अमेरिका लौटने की अनुमति दी। वह शुक्रवार को अदालत में खुद पेश हुआ था। बाकी छह आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश हुए। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया।
एनआईए ने विदेशी नागरिकों पर क्या आरोप लगाए?
एनआईए ने आरोप लगाया कि वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिक पर्यटक वीजा पर भारत आए थे। वे जरूरी परमिट लिए बिना पूर्वोत्तर क्षेत्र में गए। इसके बाद उन्होंने मिजोरम से म्यांमार में प्रवेश किया। एजेंसी के अनुसार, वहां उन्होंने जातीय सशस्त्र संगठनों को प्रशिक्षण दिया।
जांच एजेंसी ने शुरुआत में यूएपीए की धाराएं लगाई थीं। इनमें साजिश से संबंधित धाराएं भी शामिल थीं। हालांकि, एनआईए ने आरोपपत्र में यूएपीए की धाराएं शामिल नहीं कीं। इसके बजाय एजेंसी ने आव्रजन और विदेशी अधिनियम की धारा 21 और 23 के तहत कार्रवाई की। इन धाराओं के तहत आने वाले अपराधों का निपटारा विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) के सामने किया जा सकता है।
एजेंसी ने पहले कहा था कि कथित आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है। उसने यह भी संकेत दिया था कि पूरक आरोपपत्र में आगे और आरोप शामिल किए जा सकते हैं।