इंग्लैंड के वेस्ट मिडलैंड्स क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक हवेली में इस बार दिवाली का जश्न भारत और ब्रिटेन के पुराने शाही रिश्तों की कहानी के साथ मनाया जा रहा है। यहां पश्चिम बंगाल के कूच बिहार की दो राजकुमारियों की प्रेम कहानी को खास जगह दी गई है। इन दोनों राजकुमारियों ने 100 साल से भी पहले इंग्लैंड के एक ही परिवार के दो भाइयों से शादी की थी। हवेली में रोशनी, कहानियों, डिजाइन और लाइव संगीत के जरिए इस ऐतिहासिक संबंध को सामने लाया जा रहा है।
क्या है इस हवेली और बंगाल के शाही परिवार का संबंध?
वाइटविक मैनर एंड गार्डन्स नाम की इस हवेली में शनिवार, 24 अक्तूबर से दिवाली से जुड़े कार्यक्रम शुरू हुए हैं, जो 8 नवंबर को दिवाली के दिन तक चलेंगे। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण कूच बिहार के महाराजा नृपेंद्र नारायण और महारानी सुनीति देवी की बेटियों राजकुमारी प्रतीवा देवी नारायण और उनकी बहन सुधीरा की कहानी है। सुधीरा को प्यार से 'बेबी' भी कहा जाता था। दोनों बहनों को हवेली के मालिक परिवार के दो भाइयों लियोनेल मैंडर और एलन मैंडर से प्यार हुआ था। इस तरह एक भारतीय शाही परिवार का रिश्ता इंग्लैंड के एक प्रतिष्ठित परिवार से जुड़ गया।
कैसे शुरू हुई दोनों राजकुमारियों की प्रेम कहानी?
राजकुमारी प्रतीवा और लियोनेल मैंडर की शादी फरवरी 1912 में कलकत्ता, यानी आज के कोलकाता में हुई थी। विवाह समारोह वुडलैंड्स नाम के उस महल में आयोजित किया गया था, जो प्रतीवा के पिता महाराजा नृपेंद्र नारायण का था। इसके करीब दो साल बाद प्रतीवा की छोटी बहन सुधीरा और लियोनेल के छोटे भाई एलन की शादी भी फरवरी 1914 में इसी महल में हुई। एलन की मुलाकात सुधीरा से लंदन में उस समय हुई थी, जब वह बीमार थीं। इसके बाद एलन अपनी भाभी प्रतीवा से मिलने भी जाने लगे। धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई।
क्या महारानी सुनीति देवी इस शादी के खिलाफ थीं?
सुधीरा और एलन के रिश्ते को लेकर उनकी मां महारानी सुनीति देवी शुरुआत में सहमत नहीं थीं। बताया जाता है कि उन्होंने दोनों को अलग करने के लिए एक लंबी समुद्री यात्रा की व्यवस्था की थी। लेकिन एलन ने कथित तौर पर उनका पीछा दुनिया भर में किया। आखिरकार दोनों ने फरवरी 1914 में शादी कर ली। इस कहानी के जरिए यह भी सामने आता है कि उस दौर में भारतीय रियासतों के शाही परिवारों के ब्रिटेन से सामाजिक और पारिवारिक संबंध कितने गहरे थे। महाराजा नृपेंद्र नारायण और महारानी सुनीति देवी ब्रिटिश राज और ब्रिटिश शाही परिवार के समर्थक थे तथा अक्सर इंग्लैंड की यात्रा करते थे।
ब्रिटेन के शाही परिवार से कैसे जुड़े थे कूच बिहार के महाराजा?
कूच बिहार के महाराजा और महारानी ने वर्ष 1887 में महारानी विक्टोरिया की जयंती समारोह में हिस्सा लिया था। इसी यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात महारानी विक्टोरिया से हुई और उन्होंने ब्रिटिश शाही परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी समय बिताया। महाराजा ने किंग एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक समारोह में भी भाग लिया था। इस दंपती के कुल सात बच्चे थे, जिनमें प्रतीवा और सुधीरा भी शामिल थीं। उनके बेटे विक्टर नित्येंद्र नारायण, महारानी विक्टोरिया के धर्मपुत्र थे। इस ऐतिहासिक जुड़ाव को देखते हुए हवेली में भारत और ब्रिटेन के साझा इतिहास को दिवाली समारोह का हिस्सा बनाया गया है।
हवेली में भारतीय संस्कृति और कला कैसे दिखाई जाएगी?
इस आयोजन के लिए स्थानीय कलाकार कंज निकोलस ने एक विशेष कलाकृति तैयार की है। इसमें भारतीय कपड़ों, चमकीले रंगों और पारंपरिक आकृतियों को वाइटविक हवेली की कलात्मक शैली के साथ मिलाया गया है। स्थानीय लोगों के साथ प्रिंटिंग कार्यशालाएं भी आयोजित की गई हैं, जिनसे इस स्थापना को तैयार करने में मदद मिली। हवेली की देखभाल करने वाली संस्था नेशनल ट्रस्ट के मुताबिक, पुरानी पारिवारिक तस्वीरों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का काम भी चल रहा है। उम्मीद है कि इस प्रक्रिया में दोनों राजकुमारियों की हवेली से जुड़ी कुछ तस्वीरें मिल सकती हैं। संस्था ने लोगों को इस आयोजन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उसका कहना है कि दिवाली खुशियों, आत्मचिंतन और एकजुटता का त्योहार है, जो परिवारों और समुदायों को साथ लाता है।